रिश्वत की शिकायत के बीच ड्यूटी पर शतरंज खेलने का वीडियो वायरल, जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

एमसीबी के जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ क्लर्क दिनेश शर्मा को लेकर कार्यालयीन कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं। उनके खिलाफ 8 जुलाई 2026 को अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर 2 लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत किए जाने का दावा है। इसी बीच ड्यूटी के दौरान कार्यालय परिसर में शतरंज खेलते हुए उनका वीडियो सामने आया है। शिकायत पर अब तक हुई कार्रवाई और वीडियो की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर विभाग से स्पष्ट जवाब की मांग की जा रही है।

Aug 24, 2026 - 11:25
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रिश्वत की शिकायत के बीच ड्यूटी पर शतरंज खेलने का वीडियो वायरल, जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. जमील अंसारी, कोरिया l एमसीबी के जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ क्लर्क दिनेश शर्मा को लेकर एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली और कार्यालयीन अनुशासन पर सवाल उठ रहे हैं। उनके खिलाफ अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर 2 लाख रुपये रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आने के बाद अब ड्यूटी के दौरान कार्यालय परिसर में शतरंज खेलने का वीडियो सामने आया है। वीडियो को लेकर विभागीय स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग उठ रही है।

जानकारी के अनुसार 8 जुलाई 2026 को क्लर्क दिनेश शर्मा के खिलाफ रिश्वत मांगने को लेकर शिकायत किए जाने का दावा किया गया था। शिकायत में अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर 2 लाख रुपये की कथित मांग का आरोप लगाया गया था। हालांकि इस शिकायत पर अब तक विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। शिकायत की जांच किस स्तर पर पहुंची और संबंधित कर्मचारी से इस संबंध में पूछताछ हुई या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। वीडियो में दिनेश शर्मा कार्यालय परिसर में कर्मचारियों के साथ शतरंज खेलते हुए नजर आने की बात कही जा रही है। यदि वीडियो कार्यालयीन समय का है, तो सरकारी ड्यूटी के दौरान निजी गतिविधि में शामिल होने को लेकर विभागीय नियमों के तहत सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि वीडियो कब और किस परिस्थिति में बनाया गया, इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मामले को लेकर पत्रकारों द्वारा जब दिनेश शर्मा से सवाल किए गए तो उनके द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी विभागीय अधिकारियों पर आ जाती है। जांच के जरिए यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि रिश्वत संबंधी शिकायत में लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति क्या है और वायरल वीडियो में दिखाई दे रही गतिविधि कार्यालयीन समय की है या नहीं।

रिश्वत की शिकायत को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। यदि 8 जुलाई को शिकायत दर्ज की गई थी तो अब तक उसकी जांच किस स्तर तक पहुंची है। शिकायत किस अधिकारी के पास प्रस्तुत की गई, संबंधित कर्मचारी का पक्ष लिया गया या नहीं और शिकायत पर कोई विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है या नहीं, इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है।

वहीं ड्यूटी के दौरान शतरंज खेलने के वीडियो को लेकर भी शिक्षा विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों से निर्धारित समय पर अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि कर्मचारी कार्यालयीन समय में गैर-आधिकारिक गतिविधि में संलग्न था, तो विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई किए जाने का सवाल उठता है।

पूरा मामला केवल वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कार्यालय में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा है। इसलिए जिला शिक्षा अधिकारी और उच्चाधिकारियों से मांग की जा रही है कि रिश्वत की शिकायत और वायरल वीडियो दोनों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।

फिलहाल रिश्वत मांगने के आरोप और वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधि की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। अब निगाहें शिक्षा विभाग की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों और वायरल वीडियो के संबंध में वास्तविक तथ्य क्या हैं।