बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव विवाद खत्म, शासन ने दिलीप यादव की अपील खारिज कर नई कार्यकारिणी को दी मान्यता

बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव को लेकर चल रहे विवाद में राज्य शासन ने दिलीप यादव की अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही 28 दिसंबर 2025 को हुए चुनाव में अजीत मिश्रा की टीम की जीत और नई कार्यकारिणी के गठन को शासन की अंतिम मंजूरी मिल गई है।

Mar 11, 2026 - 11:47
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बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव विवाद खत्म, शासन ने दिलीप यादव की अपील खारिज कर नई कार्यकारिणी को दी मान्यता

UNITED NEWS OF ASIA. विशु तिवारी,बिलासपुर | छत्तीसगढ़ के Bilaspur प्रेस क्लब चुनाव को लेकर पिछले कई महीनों से चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। राज्य शासन ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए अपीलकर्ता Dilip Yadav की अपील को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही 28 दिसंबर 2025 को हुए चुनाव में Ajit Mishra की टीम की जीत और नई कार्यकारिणी के गठन को शासन की आधिकारिक मान्यता मिल गई है।

शासन के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप सचिव द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि अपीलकर्ता दिलीप यादव ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से पहले कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी, बल्कि वे स्वयं चुनाव में शामिल हुए थे। ऐसे में चुनाव में भाग लेने के बाद उसी प्रक्रिया को चुनौती देना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता।

दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रेस क्लब के तत्कालीन सचिव दिलीप यादव ने 7 सितंबर 2025 को चुनाव कराने के लिए अपने करीबी Mahesh Tiwari को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया और 9 सितंबर को जल्दबाजी में चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया। इस पर प्रेस क्लब के सदस्यों Dilip Agrawal और अजीत मिश्रा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए Registrar Firms and Societies Chhattisgarh के अधीन सहायक पंजीयक फर्म्स एवं संस्थाएं, बिलासपुर में शिकायत की थी।

शिकायत के बाद सहायक पंजीयक ने संस्था के पदाधिकारियों को अधिनियम की धारा 27 और 28 के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किया। इसके बावजूद 19 सितंबर 2025 को 563 सदस्यों की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव करा दिया गया। लेकिन यह मतदाता सूची पंजीयक कार्यालय से प्रमाणित नहीं होने के कारण विवाद खड़ा हो गया।

इसके बाद रजिस्ट्रार फर्म्स एवं संस्थाएं, छत्तीसगढ़ ने सहायक पंजीयक की अनुशंसा पर 19 सितंबर को हुए चुनाव को अमान्य घोषित करते हुए 18 नवंबर 2025 को नए सिरे से चुनाव कराने का आदेश दिया।

रजिस्ट्रार के आदेश के पालन में जिला प्रशासन ने सहायक पंजीयक बिलासपुर को निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया। इसके बाद वर्ष 2023 की प्रमाणित मतदाता सूची के आधार पर 447 वैध सदस्यों के बीच 28 दिसंबर 2025 को दोबारा चुनाव कराया गया। इस चुनाव में दिलीप यादव सहित सभी प्रत्याशियों ने भाग लिया।

इसी दौरान दिलीप यादव ने इस आदेश को चुनौती देते हुए Chhattisgarh High Court में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामला शासन के समक्ष अपील के रूप में प्रस्तुत किया गया। हालांकि 29 दिसंबर 2025 को हुई सुनवाई में अपीलकर्ता स्वयं उपस्थित नहीं हुए, जबकि अन्य पक्षों ने बताया कि एक दिन पहले ही चुनाव प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

शासन के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि यदि अपीलकर्ता को चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति थी तो उन्हें प्रक्रिया प्रारंभ होने से पहले अपील करनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों का हवाला देते हुए आदेश में कहा गया कि कोई भी व्यक्ति किसी प्रक्रिया में स्वेच्छा से भाग लेने के बाद उसी प्रक्रिया की वैधता को चुनौती नहीं दे सकता।

इन सभी तथ्यों के आधार पर शासन ने दिलीप यादव की अपील को अस्वीकार कर दिया है और सहायक पंजीयक बिलासपुर को अधिनियम की धारा 27 और 28 के अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

इस फैसले के साथ ही 28 दिसंबर 2025 को हुए बिलासपुर प्रेस क्लब चुनाव और नई कार्यकारिणी के गठन पर शासन की अंतिम मुहर लग गई है। इस मामले में प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा, दिलीप अग्रवाल और वीरेंद्र गहवाई की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन अग्रवाल और टैक्स कंसलटेंट सचिन कुमार सिंघल ने पैरवी की। शासन के इस फैसले से अजीत मिश्रा की टीम को बड़ी राहत मिली है, जबकि विरोधी खेमे को बड़ा झटका लगा है।