जैविक खेती से गांव होंगे समृद्ध और किसान बनेंगे आत्मनिर्भर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

बिलासपुर में आत्मा योजना के तहत आयोजित जैविक कृषि कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किसानों से जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी और उत्कृष्ट किसानों को सम्मानित किया गया।

Jun 17, 2026 - 17:49
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जैविक खेती से गांव होंगे समृद्ध और किसान बनेंगे आत्मनिर्भर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव

UNITED NEWS OF ASIA, अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर, 17 जून 2026। बिलासपुर में कृषि विभाग की एक्सटेंशन रिफॉर्म्स (आत्मा) योजना के तहत कृषि महाविद्यालय में आयोजित जैविक कृषि कार्यशाला का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जैविक खेती अपनाने से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसान आत्मनिर्भर बनेंगे।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन शैली का आधार है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभाव अब मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य दोनों पर दिखाई देने लगे हैं, ऐसे में जैविक और प्राकृतिक खेती समय की आवश्यकता बन चुकी है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जल संरक्षण, पशुपालन और गौसंवर्धन को कृषि प्रणाली का हिस्सा बनाएं। साथ ही गांवों में सामूहिक सहयोग और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में किसानों के हित में कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है।

कार्यक्रम में बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि देश की वास्तविक शक्ति गांव और किसान हैं। उन्होंने किसानों से परंपरागत खेती के साथ-साथ विविध और रसायनमुक्त खेती अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, वृक्षारोपण और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गीत शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है।

इस अवसर पर विशेषज्ञ बृजलाल राठौर ने किसानों को जैविक खेती की तकनीकों, लाभों और संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान कम लागत में अधिक गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जैविक उर्वरकों के उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और ऐसे आयोजनों को उपयोगी बताया।

जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित किसानों में जदुनंदन साहू, हजारीलाल पटेल, श्रद्धा मिश्रा और शिल्पी राजपूत सहित अन्य किसान शामिल रहे।

कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन किसानों को जैविक खेती अपनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यवहार में लाने के संकल्प के साथ हुआ।