भोजली त्यौहार हमारी संस्कृति और भाईचारे का प्रतीक, दामापुर में निकली भोजली यात्रा
दामापुर में भोजली त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। जैतपुरी की बेटियों ने भोजली यात्रा निकालकर अच्छी वर्षा और उन्नत कृषि की कामना की। अश्वनी यदु ने भोजली को छत्तीसगढ़ की संस्कृति, आपसी भाईचारे और मितान परंपरा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पर्व बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध परंपराओं, लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था के लिए जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले प्रत्येक त्योहार के पीछे सामाजिक, सांस्कृतिक और जनकल्याण से जुड़ी मान्यताएं देखने को मिलती हैं। इसी परंपरा का हिस्सा भोजली त्यौहार भी है, जिसे आपसी भाईचारे, प्रेम और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। दामापुर में भोजली त्यौहार के अवसर पर उत्साह का माहौल रहा। जैतपुरी की बेटियों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली यात्रा निकाली और श्रद्धापूर्वक भोजली का विसर्जन किया।
जनपद पंचायत पंडरिया के सभापति अश्वनी यदु ने भोजली पर्व की परंपरा और महत्व बताते हुए कहा कि सावन माह के अंतिम सप्ताह में बेटियां छोटी-छोटी टोकरियों में भोजली के बीज बोती हैं। इन टोकरियों को सुरक्षित और अंधेरे स्थान पर रखा जाता है तथा प्रतिदिन श्रद्धा और समर्पण के साथ इसकी सेवा की जाती है। भोजली के माध्यम से अच्छी वर्षा और उन्नत कृषि की कामना की जाती है। राखी त्यौहार के दूसरे दिन भोजली को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यात्रा के रूप में निकाला जाता है और गंगा स्नान कराया जाता है।
अश्वनी यदु ने कहा कि भोजली पर्व का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करने का माध्यम भी है। भोजली विसर्जन के बाद गांव के बुजुर्ग, बच्चे और अन्य लोग एक-दूसरे को भोजली भेंट कर शुभकामनाएं देते हैं। इस दौरान पारंपरिक रूप से भोजली देकर रिश्तों में आत्मीयता और सम्मान का भाव प्रकट किया जाता है।
भोजली से जुड़ी मितान परंपरा भी छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सामाजिक परंपराओं में शामिल है। भोजली विसर्जन के बाद कई लोग एक-दूसरे के कान में भोजली लगाकर मितान बनने की परंपरा निभाते हैं। इस परंपरा के माध्यम से दो परिवारों के बीच जीवनभर का आत्मीय संबंध स्थापित होने की मान्यता है। मितान बनने के बाद दोनों परिवार एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े रहने और रिश्ते को पूरी निष्ठा से निभाने का संकल्प लेते हैं।
दामापुर में आयोजित भोजली यात्रा के दौरान भी छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिली। बेटियों और ग्रामीणों ने उत्साह के साथ भोजली यात्रा में सहभागिता की। इस अवसर पर गांव में उत्सव जैसा माहौल रहा और लोगों ने एक-दूसरे को भोजली पर्व की शुभकामनाएं दीं।
अश्वनी यदु ने कहा कि भोजली त्यौहार छत्तीसगढ़ की पहचान और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पर्व प्रकृति के प्रति आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता, भाईचारे और पारिवारिक संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता है। बदलते समय के बावजूद ऐसी लोक परंपराएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम कर रही हैं। भोजली के माध्यम से समाज में प्रेम, सहयोग और आपसी जुड़ाव की भावना को आगे बढ़ाया जा रहा है।