विधानसभा में भावना बोहरा ने उठाए बिजली, राजस्व और श्रमिकों के मुद्दे

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने वनांचल क्षेत्रों में बिजली, स्वतः नामांतरण, लंबित राजस्व प्रकरण और तेंदूपत्ता संग्राहकों की सुविधाओं से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। सरकार ने लिखित जवाब में विभिन्न योजनाओं और मौजूदा स्थिति की जानकारी दी।

Jul 13, 2026 - 17:17
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विधानसभा में भावना बोहरा ने उठाए बिजली, राजस्व और श्रमिकों के मुद्दे

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने अपने विधानसभा क्षेत्र और कबीरधाम जिले से जुड़े कई महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे सदन में उठाए। उन्होंने वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति, स्वतः नामांतरण व्यवस्था, लंबित राजस्व प्रकरणों तथा वन सुरक्षा समिति एवं तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सरकार से जवाब मांगा।

विधायक भावना बोहरा ने पंडरिया विधानसभा के तेलियापानी, बिरहुलडीह, कांदावाणी, छीरपानी, रूख्मीदादर, छिंदीडीह और अमनिया ग्राम पंचायतों के 20 से अधिक गांवों में बिजली की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि कितने परिवार अब भी बिजली से वंचित हैं और कितने केवल सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। इसके साथ ही उन्होंने इन गांवों को मुख्य विद्युत ग्रिड से जोड़ने की कार्ययोजना की जानकारी भी मांगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लिखित उत्तर में बताया कि संबंधित 20 गांवों में से 8 गांव अब भी परंपरागत विद्युत व्यवस्था से वंचित हैं। इन क्षेत्रों में 71 परिवार पूरी तरह बिजली से वंचित हैं, जबकि 1127 परिवार सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। सरकार ने बताया कि इन गांवों में सौर ऊर्जा आधारित विद्युतीकरण किया गया है, जिसका रखरखाव वारंटी अवधि तक संबंधित एजेंसी और उसके बाद क्रेडा द्वारा किया जाता है। घने वन क्षेत्र होने के कारण इन गांवों को फिलहाल पारंपरिक विद्युत ग्रिड से जोड़ने की कोई कार्ययोजना नहीं है।

भावना बोहरा ने रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण प्रणाली की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने भुइयां पोर्टल में तकनीकी समस्याओं, डेटा सिंक्रोनाइजेशन, लॉग-इन एक्सेस तथा मैनुअल अभिलेखों के अद्यतन की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी।

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि विक्रय विलेखों में स्वतः नामांतरण की प्रक्रिया लागू है। भुइयां पोर्टल में सभी प्रकरण प्रदर्शित करने के लिए आवश्यक तकनीकी प्रावधान किए जा रहे हैं। एक मार्च 2024 से 31 मार्च 2026 के बीच कुल नौ तकनीकी शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनका निराकरण कर दिया गया है। त्रुटि होने पर छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों के अनुसार सक्षम अधिकारी सुधार की कार्रवाई करते हैं।

कबीरधाम जिले में लंबित राजस्व प्रकरणों को लेकर पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने बताया कि धारा 115 (त्रुटि सुधार) के तहत वर्तमान में 372 मूल एवं अपील प्रकरण लंबित हैं। इनमें देरी का प्रमुख कारण पक्षकारों की अनुपस्थिति और साक्ष्य प्रस्तुत करने में विलंब बताया गया। इन मामलों के त्वरित निराकरण के लिए राजस्व शिविर और ई-कोर्ट के माध्यम से कार्रवाई की जा रही है तथा 45 कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित है।

वन सुरक्षा समिति, लघु वनोपज और तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य से जुड़े श्रमिकों और संग्राहकों की सुविधाओं पर भी विधायक भावना बोहरा ने सरकार से जवाब मांगा। वन मंत्री केदार कश्यप ने लिखित उत्तर में बताया कि पारिश्रमिक के अतिरिक्त श्रमिकों और संग्राहकों को प्रोत्साहन राशि, बीमा, सामाजिक सुरक्षा तथा उनके बच्चों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

विधानसभा में उठाए गए इन प्रश्नों के माध्यम से भावना बोहरा ने वनांचल क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाओं, राजस्व व्यवस्था में सुधार तथा वन आधारित आजीविका से जुड़े श्रमिकों के हितों को प्रमुखता से सदन में रखा। सरकार ने विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति और सुधारात्मक प्रयासों की जानकारी देते हुए संबंधित प्रश्नों का जवाब प्रस्तुत किया।