बेमेतरा में अल्प वर्षा की आशंका, किसानों को फसल विविधीकरण और जल संरक्षण अपनाने की अपील

बेमेतरा में संभावित अल्प वर्षा को देखते हुए कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने किसानों से जल संरक्षण आधारित खेती और फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की है। कम पानी वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों से उत्पादन व आय बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

Jun 16, 2026 - 18:42
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बेमेतरा में अल्प वर्षा की आशंका, किसानों को फसल विविधीकरण और जल संरक्षण अपनाने की अपील

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l जिले में आगामी समय में अल्प वर्षा की संभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने किसानों से जल संरक्षण आधारित खेती और फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाई ने किसानों को सुझाव दिया है कि बदलते मौसम और अनिश्चित वर्षा के हालात में कृषि को सुरक्षित और लाभकारी बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना आवश्यक है।

बेमेतरा जिला वृष्टि छाया (रेन शैडो) क्षेत्र में आता है, जहां वर्षा पहले से ही सीमित और अनियमित रहती है। पिछले वर्ष जिले में मात्र 535 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई थी, जो सामान्य से काफी कम है। मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार इस वर्ष भी सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में कृषि उत्पादन और किसानों की आय को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है।

कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे अधिक पानी की आवश्यकता वाली लंबी अवधि की धान किस्मों के बजाय कम अवधि और कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों का चयन करें। इनमें एमटीयू-1010 और विक्रम टीसीआर जैसी किस्में शामिल हैं, जो मौजूदा परिस्थितियों में अधिक उपयुक्त मानी जा रही हैं।

उन्होंने किसानों को दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने की भी सलाह दी है। इससे न केवल पानी की खपत कम होगी बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। साथ ही फसल विविधीकरण अपनाने से जोखिम भी कम होता है और कृषि अधिक स्थिर बनती है।

राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। दलहन एवं तिलहन की खेती करने वाले किसानों को 10 हजार रुपये प्रति एकड़ तथा धान के स्थान पर वैकल्पिक फसलें लेने पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है।

कलेक्टर ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के इस दौर में परंपरागत खेती पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों जैसे कतार बोनी, मल्चिंग, जैविक पदार्थों का उपयोग और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना चाहिए, जिससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहे।

इसके साथ ही सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इन तकनीकों से कम पानी में भी बेहतर सिंचाई संभव है और जल की बचत होती है। धान की खेती में एसआरआई पद्धति अपनाने से भी कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कलेक्टर ने कहा कि किसान अपने खेतों में वर्षा जल संचयन के उपाय अपनाएं। इसमें खेत तालाब, मेड़बंदी, गली प्लग, स्टॉप डैम, सोक पिट और बोरवेल रिचार्ज जैसे उपाय शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि जल ही कृषि की नींव है और इसके बिना उत्पादन संभव नहीं है। यदि हम वर्षा की हर बूंद को सहेजें और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं, तो न केवल फसल सुरक्षित रहेगी बल्कि किसानों की आय भी बढ़ेगी।

कलेक्टर ने सभी किसानों से अपील की कि वे इन सुझावों को अपनाकर बेमेतरा जिले को जल-संरक्षित और कृषि समृद्ध बनाने में योगदान दें।