बस्तर के हर गांव को 1 करोड़ देने की मांग, कांग्रेस का सरकार पर दबाव

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बस्तर के सभी गांवों को 1 करोड़ रुपये देने की मांग करते हुए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने विशेष पैकेज, रोजगार और बुनियादी विकास को लेकर कई अहम मुद्दे उठाए।

Apr 4, 2026 - 11:32
Apr 4, 2026 - 13:24
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बस्तर के हर गांव को 1 करोड़ देने की मांग, कांग्रेस का सरकार पर दबाव

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने बस्तर क्षेत्र के समग्र विकास को लेकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर दबाव बनाते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार को अपनी घोषणा के अनुसार बस्तर के प्रत्येक गांव को तत्काल 1 करोड़ रुपये की राशि प्रदान करनी चाहिए।

दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने पहले यह घोषणा की थी कि जो गांव नक्सल मुक्त हो जाएंगे, उन्हें 1 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। अब जब मुख्यमंत्री से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री तक यह दावा कर रहे हैं कि बस्तर सहित पूरा प्रदेश नक्सल मुक्त हो चुका है, तो सरकार को अपनी इस घोषणा पर अमल करते हुए बस्तर संभाग के सभी गांवों को यह राशि तुरंत जारी करनी चाहिए।

उन्होंने डबल इंजन की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बस्तर के विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस योजनाओं के माध्यम से बस्तर को विकास की मुख्यधारा में लाना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए यहां रोजगार के अवसर बढ़ाने और वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की जाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बस्तर के युवाओं के रोजगार को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के युवाओं के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाया जाना चाहिए ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकें और पलायन की समस्या कम हो।

इसके साथ ही उन्होंने NMDC के मुख्यालय को बस्तर में स्थापित करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि एनएमडीसी देश की एक प्रमुख नवरत्न कंपनी है, जो बस्तर से लौह अयस्क निकालकर देश-विदेश में निर्यात करती है, लेकिन उसका मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है। पहले बस्तर में बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण यह निर्णय उचित हो सकता था, लेकिन अब क्षेत्र में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, इसलिए मुख्यालय को बस्तर में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

दीपक बैज ने यह भी आशंका जताई कि सरकार बस्तर की खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों को निजी उद्योगपतियों को सौंप सकती है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट गारंटी देने की मांग की कि बस्तर के आदिवासियों की भावनाओं के खिलाफ कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से Adani Group जैसी निजी कंपनियों की संभावित एंट्री को लेकर सवाल उठाए और कहा कि एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट या बैलाडीला और नंदराज पहाड़ियों को निजी हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए।

रेल कनेक्टिविटी के मुद्दे पर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा। दीपक बैज ने कहा कि बस्तर में रेल नेटवर्क का विस्तार बेहद जरूरी है, लेकिन केंद्र सरकार इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने दल्लीराजहरा-जगदलपुर रेल लाइन परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि इसका उद्घाटन 2017-18 में बड़े स्तर पर किया गया था और 2021 तक इसके पूरा होने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक यह परियोजना अधूरी है। उन्होंने इसे बस्तर की जनता के साथ छलावा बताया।

कांग्रेस का कहना है कि बस्तर जैसे संवेदनशील और संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र के विकास के लिए सरकार को गंभीरता से काम करना होगा। केवल राजनीतिक बयानबाजी से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस नीतियों और योजनाओं के जरिए ही बस्तर को सशक्त और समृद्ध बनाया जा सकता है।

अंत में कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भी सरकार से आग्रह किया कि बस्तर के विकास को प्राथमिकता दी जाए और वहां के लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए त्वरित निर्णय लिए जाएं।