कर्रेगुट्टा पर पहुंची बस्तर तिरंगा यात्रा, विजय के प्रतीक के रूप में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फहराया तिरंगा

बस्तर तिरंगा यात्रा के तीसरे और अंतिम दिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने बीजापुर से कर्रेगुट्टा तक करीब 600 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर यात्रा का समापन किया गया। विजय शर्मा ने इसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन बताया और कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है।

Aug 15, 2026 - 11:26
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कर्रेगुट्टा पर पहुंची बस्तर तिरंगा यात्रा, विजय के प्रतीक के रूप में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने फहराया तिरंगा

UNITED NEWS OF ASIA. बस्तर तिरंगा यात्रा के तीसरे और अंतिम दिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद महेश कश्यप ने बीजापुर से यात्रा की शुरुआत की। आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी और ताड़पाला होते हुए यात्रा कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर पहुंची, जहां उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर तिरंगा फहराकर करीब 600 किलोमीटर लंबी तीन दिवसीय बस्तर तिरंगा यात्रा का समापन किया।

तीन दिनों तक चली इस यात्रा के दौरान नारायणपुर, कोंडागांव, सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों से होकर तिरंगा यात्रा गुजरी। यात्रा का उद्देश्य बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के बाद लोगों के मन से बचे हुए भय और भ्रम को दूर करना तथा राष्ट्रध्वज के माध्यम से शांति, सुरक्षा और विकास का संदेश जन-जन तक पहुंचाना रहा।

कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराने से पहले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप ने सुरक्षा बलों के जवानों से मुलाकात की। इस दौरान शहीद जवानों की स्मृति में पौधारोपण किया गया। इसके बाद स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पहाड़ी पर तिरंगा फहराया गया। विजय शर्मा ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि यह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि वे उस स्थान पर तिरंगा फहरा रहे हैं जिसे कभी नक्सलियों का सुरक्षित गढ़ माना जाता था।

विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर की जनता की जीत हुई है और शहीद जवानों का अदम्य पराक्रम सफल हुआ है। उन्होंने कहा कि बस्तर की धरती से नक्सलवाद के सफाए का संकल्प साकार होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सुरक्षा बलों के जवानों के साहस और समर्पण को नमन करते हुए कहा कि वे जवानों का मनोबल बढ़ाने ही नहीं, बल्कि उनसे ऊर्जा प्राप्त करने के लिए भी उनके बीच आते हैं।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के 141 पुलिस जवानों को विशिष्ट सेवा और सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया है। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों के मन से भय काफी हद तक समाप्त हो चुका है और तिरंगा यात्रा ने इस विश्वास को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि बस्तर में अभी विकास के कई कार्य किए जाने बाकी हैं और क्षेत्र का विकास बस्तर की अपनी जरूरतों और गति के अनुरूप किया जाएगा।

विजय शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन तथा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर को देश के समृद्ध क्षेत्रों में शामिल करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तिरंगे के साथ संविधान की भावना भी बस्तर के हर हिस्से तक पहुंच रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि कुछ समय पहले तक कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर इस तरह पहुंचने की कल्पना करना भी मुश्किल था, लेकिन आज यहां बिना किसी भय के खड़े होकर तिरंगा फहराना गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर के कई ऐसे क्षेत्रों में पहुंच संभव हुई है, जहां कभी लोग दिन में भी जाने से डरते थे।

सांसद महेश कश्यप ने कहा कि बस्तर में करीब 600 किलोमीटर की तिरंगा यात्रा अपने आप में ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में तिरंगा पूरे सम्मान और गौरव के साथ लहराना शांति, बलिदान, हरियाली और पराक्रम का संदेश देता है।

यात्रा के दौरान आवापल्ली, गलगम, उसूर, नम्बी, ताड़पाला और कर्रेगुट्टा सहित विभिन्न स्थानों पर शहीद जवानों की स्मृति में पौधारोपण किया गया। शहीदों की शहादत से जुड़ी मिट्टी को भी संग्रहित किया गया। यात्रा के दौरान शहीद जवानों के परिजनों और ग्रामीणों से मुलाकात कर उनका हाल जाना गया।

कर्रेगुट्टा की ओर बढ़ रही तिरंगा यात्रा का ग्रामीणों ने जगह-जगह आत्मीय स्वागत किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और तिरंगे की जय के नारे लगाए। इससे पूरे मार्ग पर राष्ट्रभक्ति का वातावरण बना रहा।

यात्रा के दूसरे दिन देर रात उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप टेकलगुडेम पहुंचे। कभी घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहे इस इलाके में ग्रामीणों ने देर रात तक तिरंगा लेकर यात्रा का स्वागत किया। पूवर्ती गांव से भी ग्रामीण यात्रा के स्वागत के लिए पहुंचे। भारी बारिश के बावजूद सिलगेर, ताड़मेटला, तर्रेम और जगरगुंडा सहित आसपास के क्षेत्रों में ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली।

कर्रेगुट्टा की पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के साथ बस्तर तिरंगा यात्रा का समापन हुआ। यात्रा ने बस्तर में सुरक्षा, शांति, राष्ट्रभक्ति और विकास के संदेश को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया।