धान खरीदी और किसानों की मांगों को लेकर कांग्रेस का आंदोलन, 30 जनवरी को बलरामपुर में सांकेतिक चक्का जाम
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर बलरामपुर जिले के सभी छह ब्लॉकों में 30 जनवरी 2026 को सांकेतिक चक्का जाम और धरना प्रदर्शन किया जाएगा। यह आंदोलन राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों, विशेषकर धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं को लेकर आयोजित किया जा रहा है। कांग्रेस ने किसानों की मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है।
UNITED NEWS OF ASIA. बलरामपुर। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर बलरामपुर जिले में राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। इसी कड़ी में 30 जनवरी 2026, शुक्रवार को जिले के सभी छह ब्लॉकों में कांग्रेस द्वारा सांकेतिक चक्का जाम एवं धरना प्रदर्शन किया जाएगा। यह प्रदर्शन किसानों को हो रही परेशानियों और धान खरीदी से जुड़ी समस्याओं को लेकर आयोजित किया जा रहा है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बलरामपुर के जिला अध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सांकेतिक चक्का जाम आम जनता और किसानों के सहयोग से शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। जिले के छह ब्लॉकों में अलग-अलग स्थानों पर धरना प्रदर्शन आयोजित होगा, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 पर चक्का जाम किया जाएगा। आंदोलन का समय दोपहर 12 बजे से निर्धारित किया गया है।
कांग्रेस का आरोप है कि राज्य सरकार की नीतियों के कारण किसान वर्ग गंभीर संकट का सामना कर रहा है। विशेष रूप से धान खरीदी की प्रक्रिया में देरी, तिथि समाप्त हो जाना और पंजीकृत किसानों का धान नहीं खरीदे जाने से किसानों में भारी आक्रोश है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बलरामपुर जिले में लगभग 30 प्रतिशत किसान अभी भी अपना धान बेचने से वंचित हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
धरना प्रदर्शन के माध्यम से कांग्रेस किसानों की प्रमुख मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहती है। इनमें धान खरीदी की तिथि बढ़ाने, सभी पंजीकृत किसानों से धान खरीदे जाने और किसानों को राहत देने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देती है, तो भविष्य में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया है कि चक्का जाम पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा। आम नागरिकों से भी इस आंदोलन में सहयोग की अपील की गई है, ताकि किसानों की आवाज को मजबूती मिल सके और सरकार का ध्यान जमीनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया जा सके।