सोशल मीडिया की गुहार पर बोहरडीह पहुंची बाल चौपाल, बच्चों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई

सोशल मीडिया पर ग्रामीण की अपील के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने आरंग के बोहरडीह गांव में बाल चौपाल आयोजित की। बच्चों ने स्कूल में शौचालय और पेयजल की समस्या रखी, जिस पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम में बाल अधिकार, सुरक्षा और नैतिक मूल्यों पर भी मार्गदर्शन दिया गया।

Jul 19, 2026 - 13:19
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सोशल मीडिया की गुहार पर बोहरडीह पहुंची बाल चौपाल, बच्चों की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l सोशल मीडिया पर एक ग्रामीण की अपील के बाद छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने आरंग विकासखंड के ग्राम बोहरडीह में बाल चौपाल का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों की समस्याओं को सीधे सुनना, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उनके सर्वांगीण विकास के लिए संवाद स्थापित करना था।

बाल चौपाल की शुरुआत बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ हुई। लगातार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे कार्यक्रम में पहुंचे और अपनी समस्याएं आयोग के समक्ष रखीं। कार्यक्रम में ग्राम के गणमान्य नागरिकों के साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।

बाल चौपाल के दौरान बच्चों ने गांव के मिडिल स्कूल में शौचालय की कमी और स्थायी पेयजल व्यवस्था नहीं होने की समस्या प्रमुखता से उठाई। इन दोनों मुद्दों को बच्चों के मूलभूत अधिकारों से जुड़ा विषय मानते हुए आयोग की अध्यक्ष ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए तथा आरंग के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और विद्यालय के प्राचार्य को आयोग के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए।

कार्यक्रम में बच्चों को बाल अधिकारों के साथ-साथ बाल विवाह, बाल श्रम, गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा और आत्मरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि किसी भी प्रकार की अनुचित घटना होने पर बिना डर या संकोच के अपने माता-पिता, शिक्षकों या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर तुरंत सूचना दें।

बाल चौपाल के दौरान एक बच्ची ने अपने साथ हुई एक व्यक्तिगत घटना साझा की। इस पर वर्णिका शर्मा ने बच्ची का मनोबल बढ़ाया और उसकी बहादुरी की सराहना की। उन्होंने उपस्थित सभी बच्चों को जागरूक करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के शोषण या असुरक्षित स्थिति को कभी छिपाना नहीं चाहिए और समय पर जानकारी देना ही सबसे बड़ा साहस है।

उन्होंने कहा कि बाल चौपाल केवल समस्याओं के समाधान का मंच नहीं, बल्कि बच्चों में अच्छे संस्कार, अनुशासन, शिक्षा के महत्व और जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना विकसित करने का माध्यम भी है। उन्होंने बच्चों से मन लगाकर पढ़ाई करने, अच्छे संस्कार अपनाने और अपने उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षा संस्थान के संचालक मुरली मनोहर ने भी बच्चों को पढ़ाई में एकाग्रता बनाए रखने, नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रभावी तरीकों पर मार्गदर्शन दिया।

इस अवसर पर रूपचंद बंजारे, एडवोकेट आयुष दुबे, पचकेड़राम वर्मा, अमर माण्डले, दिनेश बघेल, महिला एवं बाल विकास विभाग के सीडीपीओ, सुपरवाइजर, ग्राम के अभिभावक तथा अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए सामूहिक प्रयासों पर भी जोर दिया गया।