33 साल बाद न्याय: अलखनंदा टॉकीज लाइसेंस निरस्तीकरण मामले में कलेक्टर टीएस छतवाल दोषी, सरगुजा राजपरिवार को मिला मुआवजा

अंबिकापुर के अलखनंदा टॉकीज लाइसेंस निरस्तीकरण के 33 साल पुराने मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी माना है। अदालत ने उन्हें सरगुजा राजपरिवार को ब्याज सहित 34,795 रुपये क्षतिपूर्ति राशि अदा करने का आदेश दिया। यह मामला 1992 में टीएस सिंहदेव द्वारा संचालित टॉकीज की लाइसेंस निरस्तीकरण से जुड़ा है।

Oct 30, 2025 - 16:37
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33 साल बाद न्याय: अलखनंदा टॉकीज लाइसेंस निरस्तीकरण मामले में कलेक्टर टीएस छतवाल दोषी, सरगुजा राजपरिवार को मिला मुआवजा

UNITED NEWS OF ASIA. अंबिकापुर। सरगुजा राजपरिवार के स्वामित्व वाले अलखनंदा टॉकीज के लाइसेंस निरस्तीकरण से जुड़ा 33 साल पुराना विवाद आखिरकार न्यायालय में सुलझ गया है। बिलासपुर उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल को दोषी ठहराते हुए आदेश दिया है कि वे राजपरिवार को ब्याज सहित 34,795 रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करें। यह मामला वर्ष 1992 में दर्ज हुआ था, जब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा टॉकीज का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था।

 

मामले के अनुसार, अलखनंदा टॉकीज का संचालन टीएस सिंहदेव द्वारा किया जा रहा था। यह टॉकीज उनके भाई अरुणेश्वर शरण सिंहदेव की स्वामित्व वाली संपत्ति थी। मार्च 1992 में सिनेमा संचालन का लाइसेंस नियमानुसार जारी हुआ था। इसी दौरान सरगुजा जिले में आदिवासी परिवार की भूख से मौत की घटना सामने आई, जिसने पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल मचा दी थी।

इस घटना को पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवेंद्र कुमारी सिंहदेव ने गंभीरता से उठाया और तत्कालीन कलेक्टर टीएस छतवाल के निलंबन की मांग की। इस विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव को अप्रैल 1992 में स्वयं वाड्रफनगर पहुंचकर हालात की समीक्षा करनी पड़ी। उस समय प्रदेश में सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी।

इसी राजनीतिक तनाव के बीच 19 अप्रैल 1992 को कलेक्टर छतवाल ने अलखनंदा टॉकीज का लाइसेंस निरस्त करने का नोटिस जारी किया। नोटिस का जवाब देने की अंतिम तिथि 23 अप्रैल थी, लेकिन 24 अप्रैल को जबलपुर हाईकोर्ट ने सिंहदेव परिवार के पक्ष में स्थगन आदेश (Stay Order) दे दिया। इसके बावजूद, कलेक्टर ने आदेश की अवहेलना करते हुए उसी दिन लाइसेंस रद्द कर टॉकीज बंद करा दिया।

इस कार्रवाई से 24 और 25 अप्रैल के चार शो रद्द हुए, जिससे करीब आठ हजार रुपये की आर्थिक क्षति हुई। वर्षों बाद न्यायालय ने इस मामले में स्पष्ट कहा कि यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण और अनुचित थी। न्यायालय ने छतवाल को व्यक्तिगत रूप से क्षतिपूर्ति भुगतान का आदेश दिया, जो अब न्यायालय में जमा करा दी गई है।

इस फैसले के साथ ही तीन दशक पुराना यह विवाद समाप्त हो गया है, जिसने कभी छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया था।