प्राप्त जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई कवर्धा परियोजना मंडल के अंतर्गत Pandariya परिक्षेत्र के कुकदूर सर्किल क्षेत्र में की गई। वन विकास निगम की टीम नियमित गश्त पर थी, इसी दौरान 6 मार्च 2026 की रात लगभग 11:45 बजे संरक्षित वन क्षेत्र कक्ष क्रमांक पीएफ/1467 में डालामौहा से भेड़ागढ़ बैगापारा जाने वाले कच्चे मार्ग पर एक संदिग्ध ट्रैक्टर दिखाई दिया।
टीम ने तत्काल घेराबंदी कर वाहन को रोका और तलाशी ली। जांच के दौरान ट्रैक्टर में राष्ट्रीयकृत वनोपज सागौन और हल्दू की लकड़ी भारी मात्रा में लदी हुई पाई गई। जब वाहन चालक से परिवहन संबंधी वैध दस्तावेज मांगे गए तो वह कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर सहित लकड़ी को मौके पर ही जप्त कर लिया।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ Indian Forest Act 1927 की धारा 33(1), 41 और 42 के तहत तथा Chhattisgarh Forest Produce Trade Regulation Act 1969 के प्रावधानों के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 18353/12 दर्ज किया गया है।
जप्त सामग्री में एक स्वराज ट्रैक्टर शामिल है जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 7.50 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा ट्रैक्टर में सागौन के 4 नग लठ्ठा एवं बल्ली (लगभग 0.128 घन मीटर), हल्दू के 12 नग लठ्ठा एवं बल्ली (लगभग 0.289 घन मीटर) तथा अन्य लकड़ी के लठ्ठे और बल्ली लगभग 0.250 घन मीटर पाए गए। सभी वनोपज की कुल अनुमानित कीमत लगभग 40 हजार रुपये आंकी गई है।
मंडल प्रबंधक के अनुसार इस प्रकरण की जानकारी मिलते ही पंडरिया परिक्षेत्र अधिकारी ने प्राधिकृत अधिकारी एवं उपमंडल प्रबंधक को सूचना दी। इसके बाद माननीय प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी सूचना भेजते हुए **Indian Forest Act 1927 की धारा 52(4) के तहत जप्त वाहन को राजसात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके साथ ही वाहन की जप्ती की जानकारी क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को भी भेज दी गई है, ताकि वाहन का किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय या हस्तांतरण नहीं किया जा सके।
यह पूरी कार्रवाई Sunil Kumar (मंडल प्रबंधक, कवर्धा परियोजना मंडल) के निर्देशन तथा Deepika Sonwani (उपमंडल प्रबंधक, बोड़ला) के मार्गदर्शन में की गई। कार्रवाई में परियोजना परिक्षेत्र अधिकारी Jagesh Gond, सहायक परियोजना क्षेत्रपाल Ranjit Kumar Patel, क्षेत्ररक्षक Jaspal Singh Markam तथा स्थानीय सुरक्षा श्रमिकों की संयुक्त टीम शामिल रही।
वन विकास निगम ने स्पष्ट किया है कि वन क्षेत्रों में अवैध कटाई, तस्करी या परिवहन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।