प्याज की उन्नत खेती को बढ़ावा देने कृषक प्रशिक्षण सह प्रक्षेत्र दिवस आयोजित, 100 से अधिक किसानों ने लिया प्रशिक्षण

कृषि विज्ञान केन्द्र कवर्धा द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत ग्राम गांगपुर में प्याज की उन्नत खेती पर कृषक प्रशिक्षण सह प्रक्षेत्र दिवस आयोजित किया गया, जिसमें लगभग 100 किसानों को वैज्ञानिक खेती, कीट एवं रोग प्रबंधन की जानकारी दी गई।

Mar 11, 2026 - 19:55
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प्याज की उन्नत खेती को बढ़ावा देने कृषक प्रशिक्षण सह प्रक्षेत्र दिवस आयोजित, 100 से अधिक किसानों ने लिया प्रशिक्षण

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा | छत्तीसगढ़ के Kawardha जिले में किसानों को प्याज की उन्नत खेती के प्रति जागरूक करने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से Krishi Vigyan Kendra Kawardha द्वारा ग्राम Gangpur में कृषक प्रशिक्षण सह प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 10 मार्च को National Horticulture Mission के अंतर्गत संचालित प्याज के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 35 एकड़ क्षेत्र में प्याज की उन्नत खेती का प्रदर्शन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान योजनांतर्गत लाभान्वित किसानों को प्याज की उन्नत किस्म भीमा किरण का बीज तथा पौध संरक्षण के लिए आवश्यक दवाइयों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में किसानों को प्याज की वैज्ञानिक पद्धति से खेती करने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें उन्नत किस्मों के चयन, रोपण विधि, पोषक तत्व प्रबंधन, सिंचाई व्यवस्था तथा रोग एवं कीट नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।

प्रक्षेत्र दिवस के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में लगाए गए प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण किया और फसल की स्थिति का मूल्यांकन किया। इस दौरान किसानों को उनकी फसल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी सलाह भी दी गई।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख Dr. B. P. Tripathi ने प्याज की फसल में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों के समन्वित प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और रोग व कीटों का प्रकोप कम होता है।

उन्होंने बताया कि प्याज की फसल में लगने वाले थ्रिप्स कीट के नियंत्रण के लिए स्पाइनोटोरम 11.7 प्रतिशत एससी (डेलीगेट) 20 मिली प्रति 15 लीटर पानी या फिप्रोलिन 5 प्रतिशत एससी 250 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव किया जा सकता है।

इसके साथ ही बैंगनी धब्बा रोग के नियंत्रण के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.2 प्रतिशत एससी तथा डाइफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एससी का 1 मिली प्रति लीटर पानी की दर से 10 से 15 दिन के अंतराल में 2 से 3 बार छिड़काव करने की सलाह दी गई।

इस अवसर पर वैज्ञानिक Dr. N. C. Banjara ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के उद्देश्यों और इसके तहत किसानों को मिलने वाले लाभों के बारे में जानकारी दी। वहीं कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक T. S. Sonwani ने किसानों को प्याज की खुदाई, ग्रेडिंग और सुरक्षित भंडारण की वैज्ञानिक विधियों के बारे में विस्तार से बताया।

कार्यक्रम में Dr. B. S. Parihar, जनपद सदस्य Ishwari Sahu, ग्राम गांगपुर के सरपंच तथा लगभग 100 किसानों ने भाग लेकर उन्नत खेती की तकनीकी जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम से किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी मिलती है और इससे उनकी आय में भी वृद्धि होने की संभावना रहती है।