भाजपा सरकार में बढ़े कोर्ट अवमानना के मामले, अकबर ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने छत्तीसगढ़ में कोर्ट की अवमानना के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए राज्यपाल को पत्र लिखा है। उन्होंने न्यायालयीन आदेशों के पालन में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। हाईकोर्ट के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच अवमानना याचिकाओं में करीब 87 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

Jun 23, 2026 - 12:20
Jun 23, 2026 - 12:22
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भाजपा सरकार में बढ़े कोर्ट अवमानना के मामले, अकबर ने राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर l छत्तीसगढ़ में अदालत की अवमानना (कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व विधि मंत्री मोहम्मद अकबर ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस संबंध में राज्यपाल रमेन डेका को पत्र लिखकर न्यायालयीन आदेशों के पालन को लेकर राज्य शासन का ध्यान आकर्षित करने और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।

मोहम्मद अकबर ने अपने पत्र में कहा है कि अवमानना प्रकरणों में लगातार वृद्धि इस बात का संकेत है कि कई स्तरों पर न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती जा रही है। उन्होंने आग्रह किया कि न्यायालयीन आदेशों के प्रभावी पालन की नियमित समीक्षा की जाए तथा संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि कानून के शासन और न्यायिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे।

उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिकाओं के आधिकारिक आंकड़े भी साझा किए। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में जहां 1,010 अवमानना याचिकाएं दायर हुई थीं, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 1,884 तक पहुंच गई। चार वर्षों में यह वृद्धि लगभग 87 प्रतिशत दर्ज की गई है।

आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में 1,279 याचिकाएं दायर हुईं। वर्ष 2023 में मामूली गिरावट के साथ यह संख्या 1,185 रही, लेकिन इसके बाद मामलों में फिर तेजी आई। वर्ष 2024 में 1,504 और वर्ष 2025 में 1,884 अवमानना याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर की गईं। यह उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है।

वर्ष 2026 के शुरुआती संकेत भी इस प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। 14 जून 2026 तक कुल 744 अवमानना याचिकाएं दायर हो चुकी हैं। हालांकि यह अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगी कि वर्ष 2025 का रिकॉर्ड टूटेगा या नहीं, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि अदालत की अवमानना से जुड़े मामलों की संख्या लगातार महत्वपूर्ण स्तर पर बनी हुई है।

अदालत की अवमानना के मामले सामान्यतः तब सामने आते हैं, जब किसी न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया जाता, आदेश के पालन में अनावश्यक देरी होती है या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया जाता है। ऐसी स्थिति में प्रभावित पक्ष न्यायालय की शरण लेकर अवमानना याचिका दायर करता है।

मोहम्मद अकबर ने कहा कि बढ़ते अवमानना मामलों को केवल आंकड़ों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे प्रशासनिक जवाबदेही और न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन से जुड़े एक गंभीर संकेत के रूप में समझना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्यपाल इस विषय को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन को आवश्यक निर्देश देने की पहल करेंगे।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अवमानना याचिकाओं की बढ़ती संख्या अब न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण विषय बनती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय के आदेशों का समयबद्ध और प्रभावी पालन सुनिश्चित करना कानून के शासन को मजबूत बनाने की दिशा में आवश्यक कदम है।