नकटी बस्ती बुलडोजर कार्रवाई के बाद सामने आया राजस्व रिकॉर्ड, खसरा नंबर 460 की जमीन पर उठे नए सवाल

रायपुर के मंदिर हसौद क्षेत्र के नकटी गांव में 85 मकानों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद संबंधित जमीन का राजस्व रिकॉर्ड सामने आया है। रिकॉर्ड के अनुसार कार्रवाई जिस भूमि पर की गई, उसका खसरा नंबर 460 है और राजस्व अभिलेखों में उसका उपयोग "शामिलात चारागाह" दर्ज है। वहीं जमीन गांव के बुजुर्गों के नाम पर दर्ज होने की जानकारी सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अब प्रशासनिक कार्रवाई और भूमि रिकॉर्ड को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

Jun 30, 2026 - 18:00
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नकटी बस्ती बुलडोजर कार्रवाई के बाद सामने आया राजस्व रिकॉर्ड, खसरा नंबर 460 की जमीन पर उठे नए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l रायपुर के मंदिर हसौद उप तहसील अंतर्गत नकटी गांव में हाल ही में हुई बुलडोजर कार्रवाई के बाद अब इस पूरे मामले में नया तथ्य सामने आया है। जिस भूमि पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 85 मकानों को हटाया था, उस जमीन का राजस्व रिकॉर्ड सार्वजनिक होने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।

उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के अनुसार संबंधित भूमि का खसरा नंबर 460 दर्ज है। रिकॉर्ड में इस जमीन का उपयोग "शामिलात चारागाह" के रूप में उल्लेखित है। साथ ही यह भी जानकारी सामने आई है कि भूमि गांव के बुजुर्गों के नाम पर दर्ज है। इस खुलासे के बाद अब कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया, भूमि की वास्तविक स्थिति और राजस्व अभिलेखों को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठने लगे हैं।

गौरतलब है कि प्रशासन ने हाल ही में नकटी बस्ती में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में करीब 85 मकानों को हटाया गया। कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों में असंतोष देखने को मिला था, वहीं प्रशासन ने इसे राजस्व भूमि से अतिक्रमण हटाने की नियमित प्रक्रिया बताया था।

बुलडोजर कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। प्रशासन के अनुसार पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में बसाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके लिए आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है ताकि प्रभावित लोगों को वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जा सके।

हालांकि अब राजस्व रिकॉर्ड सामने आने के बाद मामला केवल अतिक्रमण तक सीमित नहीं रह गया है। भूमि का स्वरूप, स्वामित्व और उसके उपयोग को लेकर विभिन्न पक्षों में चर्चा तेज हो गई है। कई लोगों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड में भूमि का विवरण इस प्रकार दर्ज है तो पूरे मामले की विस्तृत जांच और कानूनी स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस राजस्व रिकॉर्ड को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं स्थानीय स्तर पर लोग इस पूरे मामले में स्पष्ट जानकारी और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में प्रशासन, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण पर सभी की नजर रहेगी।

नकटी गांव की यह कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने की घटना नहीं रह गई है, बल्कि राजस्व अभिलेखों और भूमि के स्वरूप को लेकर भी चर्चा का विषय बन चुकी है। ऐसे में आगे की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।