फर्जी दस्तावेजों से पैतृक जमीन हड़पने का आरोप, होरीलाल वर्मा के खिलाफ एफआईआर और उच्चस्तरीय जांच की मांग
खैरागढ़ के ग्राम देवरी निवासी जनकलाल कोठले ने पैतृक कृषि भूमि के कथित फर्जी नामांतरण का आरोप लगाते हुए कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और एसडीएम को शिकायत सौंपी है। शिकायत में होरीलाल वर्मा पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण कराने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच, नामांतरण निरस्त करने और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. मनोहर सेन, खैरागढ़ l ग्राम देवरी निवासी जनकलाल कोठले ने अपनी पैतृक कृषि भूमि के कथित अवैध नामांतरण को लेकर जिला प्रशासन के समक्ष गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर पैतृक भूमि का नामांतरण होरीलाल वर्मा के नाम कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, कथित फर्जी नामांतरण को निरस्त करने तथा दोषियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
जनकलाल कोठले ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) खैरागढ़ को सौंपे आवेदन में बताया कि उनके दिवंगत पिता गणेश राम कोठले के नाम वर्ष 1992 से 2014-15 तक के बी-1, खसरा और अन्य राजस्व अभिलेखों में कुल आठ खसरों की कृषि भूमि दर्ज थी। वर्ष 2019 में उनके निधन के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन उस समय उपलब्ध ऋण पुस्तिका में कुछ खसरे दर्ज नहीं होने के कारण संबंधित भूमि का नामांतरण वारिसों के नाम नहीं हो सका।
शिकायत के अनुसार बाद में पुराने राजस्व दस्तावेज मिलने पर यह स्पष्ट हुआ कि खसरा क्रमांक 597/2, 649/2 और 658 भी गणेश राम कोठले के नाम दर्ज थे। जब परिवार ने वर्तमान ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड का अवलोकन किया तो पता चला कि नायब तहसीलदार न्यायालय, खैरागढ़ के माध्यम से नामांतरण प्रकरण क्रमांक 202506290700046 के तहत 19 जून 2025 को उक्त भूमि सहित अन्य खसरों का नामांतरण होरीलाल वर्मा के नाम दर्ज कर दिया गया।
जनकलाल कोठले का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के किसी भी सदस्य को न तो नोटिस जारी किया गया और न ही सुनवाई का अवसर दिया गया। शिकायत में कहा गया है कि परिवार ने कभी भी उक्त भूमि का विक्रय, दान, बंटवारा या किसी अन्य माध्यम से स्वामित्व हस्तांतरित नहीं किया। वर्तमान समय में भी विवादित भूमि, वहां स्थापित धनकुट्टी मशीन तथा भवन पर परिवार का वास्तविक कब्जा और उपयोग बना हुआ है।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर अथवा उनका उपयोग कर राजस्व विभाग को गुमराह किया गया और सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर पैतृक संपत्ति पर अवैध अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आएगा।
शिकायत में प्रशासन से मांग की गई है कि पूरे नामांतरण प्रकरण की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कराई जाए। साथ ही आवेदन, आदेश, नोटिस, तामील रिपोर्ट तथा प्रस्तुत सभी मूल दस्तावेज सुरक्षित रखे जाएं और आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेजों एवं हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाए।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित भूमि के संबंध में किसी भी प्रकार के नामांतरण, विक्रय, बंधक, पट्टा, हस्तांतरण अथवा अन्य राजस्व परिवर्तन पर रोक लगाई जाए। साथ ही भूमि से उत्पादित धान एवं अन्य कृषि उपज के समर्थन मूल्य पर विक्रय, ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन तथा शासकीय योजनाओं के लाभों पर भी अस्थायी रोक लगाने की मांग की गई है, ताकि विवादित संपत्ति का किसी प्रकार से दुरुपयोग न हो।
शिकायत के साथ मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पुराने बी-1 एवं खसरा अभिलेख, वर्ष 2019 के उत्तराधिकार दस्तावेज, वर्तमान ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड तथा संबंधित नामांतरण प्रकरण से जुड़े उपलब्ध दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।