03 अगस्त को निकलेगी भोरमदेव पदयात्रा, कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिलेवासियों से अधिकाधिक सहभागिता की अपील

सावन माह के प्रथम सोमवार 03 अगस्त को कवर्धा के बुढ़ा महादेव मंदिर से भोरमदेव मंदिर तक जिला प्रशासन द्वारा भव्य पदयात्रा का आयोजन किया जाएगा। कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिले के नागरिकों से बड़ी संख्या में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।

Jul 27, 2026 - 17:29
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03 अगस्त को निकलेगी भोरमदेव पदयात्रा, कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिलेवासियों से अधिकाधिक सहभागिता की अपील

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। सावन माह के प्रथम सोमवार के पावन अवसर पर आयोजित होने वाली पारंपरिक भोरमदेव पदयात्रा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष 03 अगस्त 2026 को जिला प्रशासन के तत्वावधान में कवर्धा शहर स्थित प्रसिद्ध बुढ़ा महादेव मंदिर से ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले भोरमदेव मंदिर तक भव्य पदयात्रा निकाली जाएगी। इस धार्मिक आयोजन में जिलेभर से हजारों शिवभक्तों के शामिल होने की संभावना है।

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिले के सभी नागरिकों से इस पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि सावन माह भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है और इस अवसर पर आयोजित भोरमदेव पदयात्रा जिले की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि प्रत्येक वर्ष सावन के प्रथम सोमवार को बुढ़ा महादेव मंदिर से भोरमदेव मंदिर तक पदयात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु उत्साहपूर्वक शामिल होते हैं। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी यह यात्रा 03 अगस्त को प्रातः 7 बजे बुढ़ा महादेव मंदिर से प्रारंभ होगी। उन्होंने सभी नागरिकों से परिवार सहित इस यात्रा में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की।

भोरमदेव मंदिर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव धामों में से एक है, जिसे अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और स्थापत्य कला के लिए विशेष पहचान प्राप्त है। सावन माह में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। पदयात्रा के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति, आस्था और अनुशासन के साथ भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

जिला प्रशासन द्वारा पदयात्रा को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। यात्रा मार्ग पर पेयजल, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन केवल आस्था के प्रतीक नहीं होते, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक सहभागिता को भी मजबूत करते हैं। पदयात्रा के दौरान विभिन्न आयु वर्ग के लोग एक साथ शामिल होकर धार्मिक वातावरण का अनुभव करते हैं और समाज में सद्भाव का संदेश देते हैं।

सावन माह में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस दौरान उपवास, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पदयात्रा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। भोरमदेव पदयात्रा भी इसी आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को एक मंच पर जोड़ती है।

जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर पदयात्रा में शामिल होकर अनुशासन और श्रद्धा के साथ भगवान भोलेनाथ की आराधना करें। अधिकाधिक जनभागीदारी से यह धार्मिक आयोजन न केवल भव्य बनेगा, बल्कि जिले की समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को भी नई ऊर्जा मिलेगी।