डीजल-खाद संकट पर बरसे रविंद्र चौबे, बोले- किसान परेशान, सरकार दे जवाब

धमधा दौरे पर पहुंचे छत्तीसगढ़ के पूर्व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने प्रदेश में डीजल और खाद संकट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खेती के अहम समय में किसानों को जरूरी संसाधन नहीं मिलना गंभीर चिंता का विषय है। चौबे ने सरकार से किसानों के हित में तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।

May 16, 2026 - 12:01
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डीजल-खाद संकट पर बरसे रविंद्र चौबे, बोले- किसान परेशान, सरकार दे जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. हेमंत पल, धमधा l छत्तीसगढ़ के पूर्व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान धमधा क्षेत्र पहुंचकर प्रदेश में डीजल और खाद की कमी को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि खेती-किसानी के महत्वपूर्ण समय में किसानों को आवश्यक संसाधनों के लिए भटकना पड़ रहा है, जो बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

रविंद्र चौबे ने कहा कि राजधानी रायपुर सहित बेमेतरा जिले के कई पेट्रोल पंपों पर डीजल की स्थिति “ड्राई” बनी हुई है। उन्होंने बताया कि इस समय किसान खेतों की तैयारी, जोताई और मांदा बनाने जैसे कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं। ऐसे समय में डीजल की कमी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसानों को समय पर डीजल उपलब्ध नहीं होगा तो वे खेती-किसानी का काम कैसे पूरा करेंगे।

पूर्व कृषि मंत्री ने भाजपा नेताओं के बयानों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के एक नेता यह कह रहे हैं कि अभी खेती का समय नहीं आया है और मानसून के बाद कृषि कार्य शुरू होता है। चौबे ने इस बयान को किसानों का अपमान बताते हुए कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा नेताओं को खेती-किसानी की जमीनी समझ नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान मानसून आने से पहले ही खेतों की तैयारी शुरू कर देते हैं और यह कृषि प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है।

खाद संकट को लेकर भी रविंद्र चौबे ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि फर्टिलाइजर की कमी प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम रूप से पैदा हुई स्थिति है। किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है, जिससे उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जब देश में खाद, पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी मूलभूत जरूरतों की कमी होने लगे तो आम जनता आखिर कहां जाएगी।

विदेश नीति का जिक्र करते हुए चौबे ने कहा कि भारत के पुराने मित्र देशों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर देश की आर्थिक स्थिति और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसका असर अब किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है।

रविंद्र चौबे ने प्रधानमंत्री से मांग करते हुए कहा कि किसानों और आम नागरिकों के हित में नीतियों में बदलाव किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते डीजल और खाद संकट का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में किसानों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। सरकार को चाहिए कि किसानों को समय पर खाद और ईंधन उपलब्ध कराने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।

पूर्व मंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर किसानों के मुद्दे पर सियासत तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना सकता है। वहीं किसानों की नजर अब सरकार की आगामी कार्रवाई और राहत उपायों पर टिकी हुई है।