हाईकोर्ट ने स्कूलों में मंत्रोच्चार पर लगाई मुहर, याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में मंत्र एवं प्रार्थना संबंधी राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने राज्य शासन के आदेश को बरकरार रखते हुए स्कूलों में मंत्रोच्चार जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया। फैसले का स्वागत करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने इसे मूल्यपरक शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।

Jul 3, 2026 - 13:16
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हाईकोर्ट ने स्कूलों में मंत्रोच्चार पर लगाई मुहर, याचिका खारिज

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ की शासकीय शालाओं में मंत्र एवं प्रार्थना के संबंध में जारी राज्य सरकार के आदेश को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए स्कूलों में मंत्रोच्चार और प्रार्थना संबंधी व्यवस्था को बरकरार रखा। इस फैसले के बाद सरकारी स्कूलों में राज्य शासन के निर्देशानुसार मंत्रोच्चार जारी रहेगा।

यह याचिका छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलाम रिज़वी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में 12 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेश को संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि विद्यालयों में मंत्रोच्चार का निर्देश संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन करता है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।

मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ में हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया और राज्य शासन के आदेश को वैध माना। इस फैसले के साथ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्र एवं प्रार्थना संबंधी आदेश प्रभावी बना रहेगा।

फैसले का स्वागत करते हुए स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि यह निर्णय राज्य सरकार की उस सोच को मजबूती देता है, जिसके तहत शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य छात्रों में अनुशासन, नैतिक मूल्य, सकारात्मक सोच, राष्ट्रभावना और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित करना है।

गजेन्द्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्तापूर्ण सुधारों के साथ-साथ मूल्यपरक शिक्षा को भी समान महत्व दे रही है। उनके अनुसार विद्यालयों में प्रार्थना और मंत्रोच्चार का उद्देश्य किसी धर्म विशेष का प्रचार-प्रसार करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्मविश्वास, अनुशासन और संस्कारों का विकास करना है, जिससे उनका सर्वांगीण व्यक्तित्व विकसित हो सके।

उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के इस महत्वपूर्ण फैसले से राज्य सरकार की पहल को कानूनी मजबूती मिली है और विद्यालयों में मूल्यपरक एवं संस्कारयुक्त शिक्षा को बढ़ावा देने के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। सरकार भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे कदम उठाती रहेगी, जो विद्यार्थियों के समग्र विकास और बेहतर भविष्य के निर्माण में सहायक हों।

हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर चल रही कानूनी बहस फिलहाल समाप्त हो गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के अपने संकल्प के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।