भारती विश्वविद्यालय दुर्ग में सड़क दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक साइंस पर कार्यशाला

भारती विश्वविद्यालय दुर्ग में फॉरेंसिक साइंस विभाग द्वारा सड़क यातायात दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच एवं फॉरेंसिक साइंस की भूमिका विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। विद्यार्थियों को घटनास्थल के वैज्ञानिक निरीक्षण, साक्ष्य संग्रहण, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, स्केच निर्माण और चेन ऑफ कस्टडी की व्यावहारिक जानकारी दी गई।

Aug 8, 2026 - 13:00
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भारती विश्वविद्यालय दुर्ग में सड़क दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक साइंस पर कार्यशाला

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के फॉरेंसिक साइंस विभाग द्वारा “सड़क यातायात दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच एवं फॉरेंसिक साइंस की भूमिका” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच, साक्ष्यों के संरक्षण तथा फॉरेंसिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग से परिचित कराना था।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण करने के साथ-साथ फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और घटनास्थल का स्केच तैयार करने की प्रक्रिया समझाई गई। इसके अलावा प्रत्येक साक्ष्य की पहचान से लेकर उसके संग्रहण, सुरक्षित पैकेजिंग, लेबलिंग, सीलिंग और विधिवत अग्रेषण तक की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े विभिन्न प्रकार के भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों के बारे में भी जानकारी दी गई। इनमें वाहनों के टूटे हुए हिस्से, टायरों के निशान, कांच के टुकड़े, पेंट चिप्स, रक्त के धब्बे, वस्त्र, बाल, जैविक नमूने और अन्य ट्रेस एविडेंस शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि घटनास्थल से प्राप्त किसी भी साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखना जांच की गुणवत्ता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में बताया गया कि फॉरेंसिक साइंस की भूमिका केवल अपराधों की जांच तक सीमित नहीं है। साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, दस्तावेज जालसाजी, नशीले पदार्थों से जुड़े अपराध, लैंगिक अपराध और सड़क दुर्घटनाओं जैसे मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों का सही संरक्षण एवं विश्लेषण न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग से पुलिस और अन्य जांच एजेंसियों को मामलों की विवेचना अधिक वैज्ञानिक, सटीक और साक्ष्य आधारित तरीके से करने में सहायता मिलती है। इससे जांच की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ न्यायिक प्रक्रिया में विश्वसनीयता को भी मजबूती मिलती है।

कार्यक्रम के अंत में भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र कुमार स्वर्णकार ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस जैसे व्यावहारिक विषयों पर आयोजित कार्यशालाएं विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने इस प्रकार के प्रशिक्षण को विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ उनके व्यावसायिक भविष्य के लिए भी उपयोगी बताया।

फॉरेंसिक साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष जयंत बारीक ने कहा कि कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी रही। प्रतिभागियों को फॉरेंसिक जांच की विभिन्न प्रक्रियाओं को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में फॉरेंसिक साइंस विभाग के सहायक प्राध्यापक सूरज कुमार मुदुली, निकिता साहू, भूमिका साहू, एलिसिया रेचल एलेक्स एवं अश्विनी तायड़े का विशेष सहयोग रहा। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व और उनके व्यवस्थित उपयोग की जानकारी मिली। इससे उन्हें फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में व्यावहारिक समझ विकसित करने के साथ जिम्मेदार एवं जागरूक पेशेवर बनने की दिशा में मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।