कांग्रेस ने शिक्षकों के लिए वीएसके एप से अनिवार्य हाजिरी का किया विरोध, फैसले को बताया तानाशाही
छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस ने शिक्षकों के लिए वीएसके एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने का विरोध किया है। कांग्रेस का कहना है कि तकनीकी खामियों और नेटवर्क समस्याओं के बीच यह व्यवस्था शिक्षकों के साथ अन्याय है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने शिक्षकों के लिए वीएसके (VSK) एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के निर्णय का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने इसे सरकार का तानाशाहीपूर्ण फैसला बताते हुए कहा कि इस व्यवस्था से प्रदेश के हजारों शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में आज भी मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसी स्थिति में केवल एप आधारित उपस्थिति अनिवार्य करना जमीनी वास्तविकताओं की अनदेखी है। उनका कहना है कि जिन क्षेत्रों में इंटरनेट की सुविधा ही नियमित रूप से उपलब्ध नहीं है, वहां कार्यरत शिक्षकों के लिए समय पर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना संभव नहीं होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस वीएसके एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है, वह स्वयं तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। एप में लोकेशन संबंधी त्रुटियां, सर्वर डाउन रहने की समस्या, चेक-इन और चेक-आउट में तकनीकी बाधाएं तथा इंटरनेट की कमी जैसी दिक्कतों के कारण कई शिक्षकों की उपस्थिति समय पर दर्ज नहीं हो पा रही है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि तकनीकी कारणों से किसी शिक्षक की उपस्थिति दर्ज नहीं होती और उसके आधार पर वेतन काटा जाता है, तो यह पूरी तरह अनुचित होगा। पार्टी का मानना है कि जब तक एप पूरी तरह तकनीकी रूप से सक्षम नहीं हो जाता, तब तक इसे उपस्थिति का एकमात्र आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
सुशील आनंद शुक्ला ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार इस प्रकार के प्रयोग केवल शिक्षा विभाग में ही क्यों कर रही है। उन्होंने पूछा कि क्या अन्य सरकारी विभागों में भी इसी तरह एप आधारित अनिवार्य उपस्थिति लागू की जाएगी या केवल शिक्षकों को ही इसका पालन करना होगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षक पहले से ही पढ़ाई के अलावा अनेक प्रशासनिक और गैर-शैक्षणिक कार्यों का दायित्व निभा रहे हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों, सरकारी अभियानों और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों में भी शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं। इसके बावजूद सरकार उनकी कार्यनिष्ठा और ईमानदारी पर संदेह करती दिखाई दे रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि वीएसके एप की तकनीकी कमियों को दूर करने, नेटवर्क संबंधी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करने और शिक्षकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए। पार्टी का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों पर अतिरिक्त तकनीकी दबाव डालने के बजाय उन्हें बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।