मनरेगा में राज्यांश बढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस का विरोध, दीपक बैज ने राज्य सरकार पर साधा निशाना

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा में राज्यांश बढ़ाने के मंत्रिमंडलीय निर्णय का विरोध किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया कि इस फैसले से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और अन्य विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। यह बयान कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।

Jun 30, 2026 - 12:51
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मनरेगा में राज्यांश बढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस का विरोध, दीपक बैज ने राज्य सरकार पर साधा निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने मनरेगा में राज्य सरकार की हिस्सेदारी बढ़ाने से जुड़े मंत्रिमंडलीय निर्णय का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि इस निर्णय से राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और अन्य विकास योजनाओं के लिए उपलब्ध धन प्रभावित हो सकता है। यह आरोप कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा राज्य सरकार का पक्ष इस विज्ञप्ति में शामिल नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा शासित मध्यप्रदेश, बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने मनरेगा के वित्तीय भार को लेकर आपत्ति जताई है, जबकि छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल ने मनरेगा के नए वित्तीय प्रावधान का अनुमोदन कर दिया। उनके अनुसार, राज्य सरकार को भी प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था पर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए थी।

दीपक बैज का कहना है कि राज्य के वित्तीय संसाधन पहले से सीमित हैं और जीएसटी व्यवस्था के कारण राज्यों की आय पर भी प्रभाव पड़ा है। ऐसे में यदि मनरेगा योजना में राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ती है तो इसका असर अन्य विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विषय पर राज्य के हितों की पर्याप्त पैरवी नहीं कर सकी।

कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार के नए प्रावधान के अनुसार मनरेगा के व्यय में राज्य को अधिक योगदान देना होगा। पार्टी का कहना है कि यदि राज्य सरकार को अतिरिक्त वित्तीय भार वहन करना पड़ेगा तो ग्रामीण विकास और अन्य क्षेत्रों के बजट पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। कांग्रेस ने इस व्यवस्था की समीक्षा करने तथा राज्य के हितों के अनुरूप केंद्र सरकार से विशेष सहायता की मांग करने की बात कही है।

दीपक बैज ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा मनरेगा के लिए किए गए वित्तीय प्रावधान और कार्य दिवसों को लेकर भी कई सवाल हैं। उनका कहना है कि यदि बजट सीमित रहेगा तो अधिक दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का दावा व्यवहारिक रूप से कठिन होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मनरेगा कार्यों के संचालन में विलंब से ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिलने में देरी हो सकती है।

कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार को मनरेगा के वित्तीय प्रावधानों पर पुनर्विचार करना चाहिए और केंद्र सरकार से राज्य पर पड़ने वाले अतिरिक्त भार को कम करने के लिए पहल करनी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि वर्तमान निर्णय से राज्य की आर्थिक स्थिति पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है।

यह समाचार छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है। इसमें व्यक्त आरोप और दावे कांग्रेस के हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है तथा इस विषय पर राज्य सरकार या संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। यदि सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए ताकि पाठकों को दोनों पक्षों की जानकारी मिल सके।