कबीरधाम में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत जागरूकता कार्यशाला, जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और छह माह तक मां का दूध पिलाने पर जोर
विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर कबीरधाम जिले के शासकीय बालगृह जोराताल, कवर्धा में जिला स्तरीय स्तनपान जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक केवल मां का दूध देने और इसके बाद उचित पूरक आहार के साथ कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने पर जोर दिया।
UNITED NEWS OF ASIA. विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर शासकीय बालगृह जोराताल, कवर्धा के सभागार में जिला स्तरीय स्तनपान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना तथा मैदानी स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रभावी परामर्श और व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रशिक्षित करना रहा।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने शिशु के जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने पर विशेष जोर दिया। साथ ही छह माह की आयु तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाने और छह माह के बाद उचित पूरक आहार के साथ कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की जानकारी दी गई।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी चंचल यादव और परियोजना अधिकारी दशरंगपुर कृतिका सिंह ने विश्व स्तनपान सप्ताह के उद्देश्य, स्तनपान के महत्व तथा विभागीय भूमिका के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि माताओं और परिवारों तक सही एवं वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाना शिशु के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए महत्वपूर्ण है।
परियोजना अधिकारी कवर्धा विवेका हैरिस ने आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका, मातृ परामर्श तथा व्यवहार परिवर्तन संचार के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने मैदानी अमले से माताओं को स्तनपान के संबंध में नियमित और प्रभावी परामर्श देने की आवश्यकता बताई।
कार्यशाला में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलील मिश्रा ने स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिशु को स्तनपान कराने की सही विधि, स्तनपान के दौरान माताओं को आने वाली सामान्य समस्याओं और उनके समाधान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ स्वास्थ्य विभाग के शिशु रोग विशेषज्ञ, एनआरसी प्रतिनिधि तथा मितानिन बहनों ने सहभागिता की। प्रतिभागियों को माताओं तक स्तनपान संबंधी सही जानकारी पहुंचाने और व्यवहार परिवर्तन के लिए प्रभावी संवाद स्थापित करने के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर और खुली चर्चा का आयोजन किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने स्तनपान, मातृ परामर्श और शिशु पोषण से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। कार्यशाला के माध्यम से जिले में माताओं और परिवारों के बीच स्तनपान को लेकर जागरूकता बढ़ाने तथा शिशुओं के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य को बढ़ावा देने का संदेश दिया गया।