कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, वैज्ञानिक खेती से कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर

कवर्धा के कृषि विज्ञान केन्द्र में पंडरिया और बोड़ला विकासखंड के कृषि अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में खरीफ फसलों के समन्वित पौध प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, जल और उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य तथा वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी दी गई। अधिकारियों को किसानों तक समय पर वैज्ञानिक सलाह पहुंचाने और विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

Aug 21, 2026 - 11:13
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कृषि विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, वैज्ञानिक खेती से कम लागत में अधिक उत्पादन पर जोर

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। कृषि विज्ञान केन्द्र में पंडरिया और बोड़ला विकासखंड में कार्यरत कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ उपसंचालक कृषि अमित मोहंती और कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बीपी त्रिपाठी ने किया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य खरीफ फसलों में समन्वित पौध प्रबंधन और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना रहा। इस दौरान फसलों में रोग एवं कीट प्रबंधन के साथ किसानों को समय पर वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।

प्रशिक्षण में धान की फसल में होने वाले प्रमुख रोगों की पहचान, रोकथाम और नियंत्रण की जानकारी दी गई। धान में झुलसा, जीवाणु जनित झुलसा और भूरा धब्बा रोग के लक्षणों तथा उनके नियंत्रण के उपायों से अधिकारियों-कर्मचारियों को अवगत कराया गया। उपसंचालक कृषि अमित मोहंती ने विभागीय योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने और योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रशिक्षण में प्राप्त वैज्ञानिक जानकारी को मैदानी स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।

कृषि विज्ञान केन्द्र के विषय वस्तु विशेषज्ञों ने खरीफ फसलों में खरपतवार, जल एवं उर्वरक प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, जैविक खेती, उद्यानिकी फसलों की उत्पादन तकनीक, प्रक्षेत्र योजना, पशुओं में होने वाले संक्रामक रोग एवं उनके निदान और कृषि यंत्रों के उपयोग सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। प्रशिक्षणार्थियों को कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र फार्म का भ्रमण भी कराया गया, जहां सोयाबीन की खेती, औषधीय रोपणी और क्रॉप कैफेटेरिया में धान, सोयाबीन, मूंग एवं उड़द की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन दिखाया गया।

प्रशिक्षणार्थियों ने समन्वित कृषि प्रणाली के अंतर्गत मुर्गी पालन, पशुधन उत्पादन और मछली सह-बत्तख पालन इकाइयों का भी अवलोकन किया। इस दौरान कृषि की विभिन्न गतिविधियों को आपस में जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, बीटीएम और एटीएम सहित कुल 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों का कहना है कि प्रशिक्षण से मैदानी अमले को आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी मिलेगी और इसका लाभ किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में मदद मिलेगी।