नीली क्रांति से बदल रही ग्रामीण तस्वीर, मछली पालन बना रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार
मछली पालन आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने वाला प्रमुख व्यवसाय बनकर उभरा है। केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की विभिन्न योजनाओं, प्रशिक्षण, अनुदान और आधुनिक तकनीकों की मदद से किसानों, युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। 'नीली क्रांति' ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l भारत में कृषि के साथ-साथ सहायक व्यवसायों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के बीच मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बनकर उभरा है। कम लागत, कम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में लगातार बढ़ती मांग के कारण मत्स्य पालन आज लाखों किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन चुका है। यही कारण है कि 'नीली क्रांति' अब ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय किसानों से खेती को केवल धान तक सीमित न रखने और दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन तथा मत्स्य पालन जैसे आयवर्धक व्यवसाय अपनाने का लगातार आह्वान कर रहे हैं। इसी सोच के अनुरूप केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाओं का संचालन कर रही हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, जलाशय, नहर और अन्य जल स्रोतों का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। पौष्टिक भोजन के रूप में मछली की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र की संभावनाओं को और मजबूत किया है। मत्स्य पालन केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि मत्स्य बीज उत्पादन, आहार निर्माण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध करा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है। आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों, तालाब प्रबंधन, रोग नियंत्रण, मत्स्य बीज उत्पादन और विपणन से जुड़े विषयों पर नियमित प्रशिक्षण आयोजित किए जा रहे हैं। प्रगतिशील मत्स्य पालकों को अन्य राज्यों के सफल मॉडल का अध्ययन कराने के लिए भ्रमण भी कराया जाता है, जिससे वे नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ा सकें।
राज्य सरकार मत्स्य सहकारी समितियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के हितग्राहियों को नाव-जाल, स्पॉन संवर्धन और झींगा सह मछली पालन जैसी योजनाओं का लाभ भी दे रही है। वहीं छोटे मछुआरों को आइस बॉक्स, तराजू और अन्य उपकरण उपलब्ध कराकर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से नए तालाब निर्माण, मत्स्य बीज उत्पादन, रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), केज कल्चर और सजावटी मछली पालन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही शीत संयंत्र, प्रशीतित वाहन, लाइव फिश सेंटर और आधुनिक विपणन सुविधाओं के माध्यम से मछलियों की गुणवत्ता बनाए रखते हुए बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में भी सरकार मछुआरों के लिए बचत सह राहत योजना और निःशुल्क समूह बीमा जैसी योजनाएं संचालित कर रही है। बंद मछली पकड़ने की अवधि में आर्थिक सहायता और दुर्घटना अथवा मृत्यु की स्थिति में वित्तीय सुरक्षा जैसी सुविधाएं मत्स्य पालकों को संबल प्रदान कर रही हैं।
आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और प्रभावी सरकारी योजनाओं के कारण मत्स्य पालन अब ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुका है। इच्छुक किसान और युवा अपने निकटतम मत्स्य विभाग कार्यालय से संपर्क कर इन योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर इस व्यवसाय से जुड़कर अपनी आय और आजीविका को नई दिशा दे सकते हैं।