भगतदेवरी पंचायत में सरपंच की अनुपस्थिति और सरपंच पति के हस्तक्षेप पर ग्रामीणों का विरोध, जांच की मांग

महासमुंद जिले के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भगतदेवरी में सरपंच की लंबे समय से अनुपस्थिति और पंचायत कार्यों में सरपंच पति के कथित हस्तक्षेप को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने पंचायत निधि के उपयोग, कथित फर्जी हस्ताक्षर, राशि आहरण और पंचायत संचालन की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कलेक्टर और जिला प्रशासन से कार्रवाई की अपील की है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

Jun 29, 2026 - 18:05
Jun 29, 2026 - 18:05
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भगतदेवरी पंचायत में सरपंच की अनुपस्थिति और सरपंच पति के हस्तक्षेप पर ग्रामीणों का विरोध, जांच की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुन्द l पिथौरा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत भगतदेवरी में पंचायत संचालन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्वाचित सरपंच की लंबे समय से अनुपस्थिति और पंचायत के कार्यों में सरपंच पति के कथित हस्तक्षेप को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत राज अधिनियम की भावना के विपरीत पंचायत का संचालन निर्वाचित जनप्रतिनिधि के स्थान पर उनके पति द्वारा किया जा रहा है, जिससे पंचायत व्यवस्था प्रभावित हो रही है और आम लोगों को आवश्यक सेवाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है

ग्रामीणों का कहना है कि निर्वाचित सरपंच गूंजा नायक पिछले लगभग आठ महीनों से पंचायत और गांव से अनुपस्थित हैं। उनके नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहने के कारण पंचायत के कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, पंचायत संबंधी अनुशंसाएं तथा अन्य प्रशासनिक कार्य समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों, किसानों और आम नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सरपंच की अनुपस्थिति के दौरान उनके पति जय नायक पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। उनका दावा है कि ग्राम सभा और पंचायत बैठकों में निर्वाचित सरपंच के स्थान पर सरपंच पति उपस्थित रहते हैं तथा पंचायत के निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि पंचायत की राशि के आहरण में फर्जी हस्ताक्षर किए जाने और नियमों के विपरीत वित्तीय कार्यवाही किए जाने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि सरपंच वास्तव में कई महीनों से पंचायत में उपस्थित नहीं हैं तो हाल के दिनों में पंचायत खाते से राशि किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई, इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।

ग्रामीणों के अनुसार कुछ दिन पूर्व पंचायत में बैठक आयोजित कर सरपंच को बुलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन उनकी जगह सरपंच पति ने कथित रूप से गांव के कोटवार के साथ अभद्र व्यवहार किया। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कोटवार के साथ गाली-गलौज करते हुए बैठक में आने से इनकार किया और स्वयं को प्रभावशाली बताते हुए चुनौतीपूर्ण भाषा का इस्तेमाल किया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी बढ़ गई।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि पंचायत के विकास कार्यों और विभिन्न योजनाओं में खर्च की गई राशि को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। उनका आरोप है कि पंचायत में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है और विकास कार्यों की जानकारी ग्रामीणों को नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। ग्रामीणों ने पंचायत के वित्तीय अभिलेखों, विकास कार्यों, भुगतान प्रक्रिया तथा पंचायत खाते से किए गए सभी आहरण की विस्तृत जांच की मांग की है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निर्वाचित सरपंच लंबे समय से पंचायत के कार्यों से अनुपस्थित हैं और पंचायत संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा है, तो पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने पंचायत में प्रशासनिक व्यवस्था को सामान्य बनाने और ग्रामीणों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए भी उचित कदम उठाने की मांग की है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि केवल भगतदेवरी पंचायत ही नहीं, बल्कि पिथौरा जनपद क्षेत्र की पाटनदादर, सोहागपुर, डोगरीपाली सहित कई पंचायतों में भी महिला सरपंचों के स्थान पर उनके परिजनों द्वारा पंचायत कार्यों में हस्तक्षेप किया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह महिला आरक्षण की मूल भावना के विपरीत है और इस पर भी प्रशासन को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

ग्रामीणों ने कलेक्टर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पंचायत के अभिलेखों की जांच करने, पंचायत निधि के उपयोग का ऑडिट कराने तथा दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि पंचायत लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है और इसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी तथा नियमसम्मत होनी चाहिए।