धान खरीदा, भुगतान नहीं: बलरामपुर के किसान आर्थिक संकट में, फिर आंदोलन की चेतावनी

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र के किसान धान बेचने के महीनों बाद भी भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इलाज, खाद-बीज और कर्ज चुकाने तक के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं। प्रशासन के आश्वासन के बावजूद भुगतान नहीं होने पर किसानों ने फिर से उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

Jun 30, 2026 - 18:15
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धान खरीदा, भुगतान नहीं: बलरामपुर के किसान आर्थिक संकट में, फिर आंदोलन की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में धान बेचने वाले किसान इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि सरकार ने उनका धान तो खरीद लिया, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं किया गया। भुगतान अटकने से किसानों के सामने परिवार चलाने, इलाज कराने, कर्ज चुकाने और नई फसल की तैयारी करने तक का संकट खड़ा हो गया है।

किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन उनके पास खाद और बीज खरीदने के लिए भी पैसे नहीं हैं। मजबूरी में उन्हें साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेना पड़ रहा है। अब साहूकार लगातार वसूली के लिए घर पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता जा रहा है। कई परिवारों में रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया है

किसानों के अनुसार उन्होंने अपनी मांगों को लेकर पहले भी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया था। 9 जून 2026 को किसानों ने मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के नाम रामानुजगंज एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर लंबित भुगतान और फर्जी लोन के मामलों के निराकरण की मांग की थी। जब मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब 17 जून को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के सामने अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू की गई। यह आंदोलन लगातार पांच दिनों तक चला, जिसमें दो किसान आमरण अनशन पर भी बैठे।

आंदोलन के दौरान प्रशासन ने किसानों से बातचीत की थी। किसानों का कहना है कि अधिकारियों ने जल्द समाधान और भुगतान का भरोसा दिया, जिसके बाद उन्होंने आंदोलन समाप्त कर दिया। हालांकि किसानों का आरोप है कि आश्वासन के बावजूद अब तक न तो उनके खातों में धान की राशि पहुंची है और न ही फर्जी लोन से जुड़े मामलों का समाधान हुआ है।

भुगतान में देरी के कारण किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। कई परिवारों में बीमारी के बावजूद इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। वहीं नई खेती शुरू होने से पहले जरूरी कृषि सामग्री खरीदना भी मुश्किल हो गया है। किसानों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं मिलने से उनकी पूरी कृषि व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

अब किसानों ने प्रशासन और शासन को दोबारा चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही धान का बकाया भुगतान नहीं किया गया और फर्जी लोन की समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे फिर से आंदोलन शुरू करेंगे। किसानों ने यह भी कहा है कि इस बार आंदोलन पहले से अधिक व्यापक और उग्र हो सकता है। यदि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होती है तो इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

फिलहाल किसान अपने बकाया भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर किसानों की निगाहें टिकी हुई हैं। वहीं यह मुद्दा अब क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति और कृषि व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।