जलीय कृषि बीमा योजना से मत्स्य पालकों को मिलेगा आर्थिक सुरक्षा कवच : लखनलाल धीवर

रायपुर में आयोजित जलीय कृषि बीमा जागरूकता कार्यशाला में मत्स्य पालकों को प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना और जलीय कृषि बीमा योजना की जानकारी दी गई। कार्यशाला में बीमा के लाभ, पात्रता, पंजीयन प्रक्रिया और जोखिम प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी साझा की।

Jun 26, 2026 - 13:03
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जलीय कृषि बीमा योजना से मत्स्य पालकों को मिलेगा आर्थिक सुरक्षा कवच : लखनलाल धीवर

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l राष्ट्रीय मात्स्यिकी कृषि विकास बोर्ड (एनएफडीबी) और मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के संयुक्त तत्वावधान में प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना के अंतर्गत जलीय कृषि बीमा जागरूकता कार्यशाला का आयोजन रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य मत्स्य पालकों को जलीय कृषि बीमा योजना, जोखिम प्रबंधन तथा प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना के विभिन्न लाभों की जानकारी देना था। कार्यक्रम में रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से 200 से अधिक मत्स्य पालकों ने भाग लिया

कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष लखनलाल धीवर ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, बीमारियों और अन्य जोखिमों से मत्स्य पालन व्यवसाय को होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई के लिए जलीय कृषि बीमा योजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने मत्स्य पालकों से इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की

मत्स्य पालन विभाग के संचालक एन.एस. नाग ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना के माध्यम से मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन देने और मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बीमा योजना को जोखिम प्रबंधन का प्रभावी माध्यम बताते हुए सभी मत्स्य पालकों को इससे जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रीय मात्स्यिकी कृषि विकास बोर्ड के बीमा विशेषज्ञ मो. इफ्तिखार हुसैन ने जलीय कृषि बीमा योजना के प्रावधानों और पात्रता की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर तक के जलक्षेत्र का बीमा कराने पर प्रीमियम राशि का 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला हितग्राहियों को अतिरिक्त 10 प्रतिशत अनुदान का लाभ भी मिलता है। योजना के तहत अधिकतम एक लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

कार्यशाला में मत्स्य पालन से जुड़ी संरचनाओं जैसे पॉण्ड लाइनर, केज कल्चर, री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) और बायोफ्लॉक इकाइयों के बीमा प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन संरचनाओं को भी बीमा सुरक्षा के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे संभावित आर्थिक नुकसान की स्थिति में मत्स्य पालकों को राहत मिल सके।

कॉमन सर्विस सेंटर के स्टेट हेड जय नारायण पटेल ने प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना एवं राष्ट्रीय मत्स्यिकी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन पंजीयन की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। वहीं एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने बीमा दावा प्रक्रिया, जोखिम कवरेज और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दी। कार्यशाला के अंत में आयोजित संवाद सत्र में मत्स्य पालकों की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। प्रतिभागियों ने इस पहल को मत्स्य पालन व्यवसाय को सुरक्षित और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।