पशुधन संरक्षण से ही सुरक्षित होगा मानव स्वास्थ्य: सांसद बृजमोहन अग्रवाल

विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पशुधन संरक्षण, जैविक खेती और मानव स्वास्थ्य के बीच संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और पशु चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।

Apr 26, 2026 - 11:17
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पशुधन संरक्षण से ही सुरक्षित होगा मानव स्वास्थ्य: सांसद बृजमोहन अग्रवाल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पशुधन, मानव स्वास्थ्य और प्रकृति के संतुलन के गहरे संबंध पर विस्तार से चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ पशु चिकित्सा अधिकारी (अज-अजजा) संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “पशु चिकित्सकों का मानव स्वास्थ्य एवं पोषण आहार पूर्ति में विशेष योगदान” रखा गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल शामिल हुए और उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए पशुओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।

अपने संबोधन में सांसद अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पशुधन को समृद्धि का प्रतीक माना गया है। उन्होंने बताया कि पहले के समय में किसी व्यक्ति की संपन्नता का आकलन उसके पास मौजूद पशुओं की संख्या से किया जाता था। हालांकि, समय के साथ यह परंपरा कमजोर पड़ गई और आज स्थिति यह है कि बहुत कम किसानों के पास पशुधन बचा है। इसके पीछे चारे की समस्या और पशुओं के प्रति घटती संवेदनशीलता को प्रमुख कारण बताया गया।

उन्होंने सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि समाज में पशुओं के प्रति लगाव कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई बार पशु कचरे के ढेर में प्लास्टिक खाने को मजबूर हो जाते हैं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इस स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने पशु चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने और हर जिले व ब्लॉक स्तर पर पशु एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

कार्यक्रम में उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उनके घर में वर्षों से जैविक खेती की परंपरा रही है और वे अपने खेतों में गायों का उपयोग केवल दूध के लिए नहीं, बल्कि खेती के लिए करते हैं। उन्होंने कहा कि गोबर और गौमूत्र का उपयोग खेती में करने से न केवल फसलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। उनके अनुसार, प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज और सब्जियां शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होती हैं।

सांसद अग्रवाल ने यह भी कहा कि यदि पशुओं की संख्या में लगातार कमी आती रही, तो इसका सीधा असर प्रकृति के संतुलन पर पड़ेगा। इससे पर्यावरणीय समस्याएं और प्राकृतिक आपदाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने पशु चिकित्सकों से अपील की कि वे केवल उपचार तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी कार्य करें।

इसके साथ ही उन्होंने सरकार की योजनाओं, जैसे ‘बरसीम घास’ उगाने की पहल, को किसानों तक पहुंचाने पर बल दिया, ताकि पशुओं के लिए चारे की समस्या को कम किया जा सके। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए पशु चिकित्सा संघ को बधाई दी और कहा कि पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा करना वास्तव में मानव समाज के भविष्य को सुरक्षित करना है।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी से पशुओं के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखने और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।