वेदांता पावर प्लांट हादसा: मौतों का आंकड़ा 21 पहुंचा, कई श्रमिकों की हालत गंभीर
सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर विस्फोट में मृतकों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। कई श्रमिक अभी भी गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि जांच में लापरवाही के संकेत मिले हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे में मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ताजा अपडेट के अनुसार, झुलसे एक और श्रमिक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 21 पहुंच गया है। मृतक की पहचान मध्यप्रदेश के सिंगरौली निवासी किस्मत अली के रूप में हुई है, जिन्होंने गुरुवार शाम करीब पांच बजे रायपुर के अस्पताल में अंतिम सांस ली।
यह हादसा प्रदेश के हालिया सबसे बड़े औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है, जिसने श्रमिक सुरक्षा और औद्योगिक मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में झुलसे कई श्रमिकों की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, इस दुर्घटना में गंभीर रूप से झुलसे 14 श्रमिकों का इलाज रायपुर और रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। इनमें से कई की हालत नाजुक बताई जा रही है। उपेंद्र साहू नामक श्रमिक की स्थिति सबसे अधिक गंभीर है, जिनका शरीर लगभग 90 प्रतिशत तक झुलस चुका है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
गौरतलब है कि यह भीषण हादसा 14 अप्रैल की दोपहर उस समय हुआ, जब वेदांता पावर प्लांट के बॉयलर-1 में अचानक ट्यूब फट गई। इस विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बॉयलर की संरचना को भारी नुकसान पहुंचा और वहां मौजूद श्रमिक इसकी चपेट में आ गए। घटना के वक्त कुल 35 श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनमें से चार की मौके पर ही मौत हो गई थी।
हादसे के बाद की गई प्रारंभिक जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, प्लांट में लंबे समय से तकनीकी खामियां मौजूद थीं, लेकिन इसके बावजूद संचालन जारी रखा गया। इस लापरवाही को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। अब संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि जिम्मेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इधर, हादसे के बाद वेदांता प्रबंधन ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और गंभीर घायलों को 15 लाख रुपये तक मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही, परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है। हालांकि, मजदूर संगठनों ने इस मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपये और स्थायी नौकरी की मांग की है।
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन की आवश्यकता को उजागर किया है। यदि समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। फिलहाल, पूरे मामले पर प्रशासन और श्रम विभाग की नजर बनी हुई है और पीड़ितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।