भावना बोहरा ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम था। इसके लिए 16 से 18 अप्रैल तक लोकसभा का विशेष सत्र भी बुलाया गया, लेकिन कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने मिलकर इस विधेयक का विरोध किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका।
उन्होंने विपक्ष के इस रुख को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि चुनाव के समय महिलाओं के सशक्तिकरण की बात करने वाले दल अब उनके अधिकारों को ही रोकने का प्रयास कर रहे हैं। “लड़की हूं, लड़ सकती हूं” जैसे नारे देने वाली कांग्रेस पार्टी का यह व्यवहार महिलाओं के प्रति उसकी वास्तविक सोच को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल वोट बैंक समझने की मानसिकता अब देश स्वीकार नहीं करेगा।
भावना बोहरा ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं है, बल्कि यह देश की करोड़ों महिलाओं के वर्षों पुराने संघर्ष, उनके सपनों और समान भागीदारी के अधिकार का प्रतीक है। इस विधेयक के माध्यम से महिलाओं को नीति निर्माण, नेतृत्व और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त होना था, लेकिन विपक्ष ने इस अवसर को नष्ट कर दिया।
उन्होंने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण को नई दिशा मिली है। उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृत्व लाभ, महिला सुरक्षा के लिए सख्त कानून और तीन तलाक जैसे मुद्दों पर लिए गए निर्णय महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले साबित हुए हैं। अब राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए यह विधेयक भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
विधायक बोहरा ने यह भी कहा कि एक महिला जनप्रतिनिधि होने के नाते यह विषय उनके लिए बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि देश की हर महिला यह देख रही है कि कौन उनके अधिकारों के साथ खड़ा है और कौन उन्हें रोकने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की महिलाएं इस मुद्दे पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी और भविष्य में इसका प्रभाव राजनीतिक परिदृश्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
अंत में उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की राजनीति अब जनहित से भटककर केवल विरोध तक सीमित रह गई है। देशहित के महत्वपूर्ण निर्णयों पर लगातार नकारात्मक रुख अपनाना यह दर्शाता है कि उनके लिए राष्ट्रहित से अधिक राजनीतिक लाभ महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जनता अब यह समझ चुकी है कि विकास के मार्ग में कौन साथ है और कौन बाधा डाल रहा है।