आत्मसमर्पण के बाद नक्सली लीडर भूपति का संदेश – “हथियार छोड़ो, जनता के साथ लोकतांत्रिक रास्ता अपनाओ”

नक्सली संगठन के शीर्ष नेता वेणुगोपाल ऊर्फ भूपति ने आत्मसमर्पण के बाद अपने साथियों से हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब हालात बदल चुके हैं और निर्दोष ग्रामीण नक्सल हिंसा की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह नक्सल आंदोलन में वैचारिक दरार का संकेत है।

Nov 2, 2025 - 11:35
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आत्मसमर्पण के बाद नक्सली लीडर भूपति का संदेश – “हथियार छोड़ो, जनता के साथ लोकतांत्रिक रास्ता अपनाओ”

UNITED NEWS OF ASIA. पखांजूर। नक्सली संगठन सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेता वेणुगोपाल ऊर्फ भूपति ने आत्मसमर्पण के बाद अपने सक्रिय साथियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब परिस्थितियाँ बदल चुकी हैं और बंदूक की राजनीति ने केवल निर्दोष ग्रामीणों को पीड़ा दी है, जिनके नाम पर यह लड़ाई लड़ी जाने का दावा किया गया था।

भूपति ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि संगठन के भीतर वैचारिक संकट गहराता जा रहा है। “अब समय आत्ममंथन का है, न कि बंदूक उठाने का,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार बदलाव की सच्ची लड़ाई लोकतांत्रिक माध्यमों से जनता के साथ मिलकर लड़ी जानी चाहिए।

सुरक्षा एजेंसियों ने इस घटनाक्रम को नक्सल आंदोलन में अब तक की सबसे बड़ी वैचारिक दरार बताया है। उनका कहना है कि नक्सली नेतृत्व में बढ़ती अंतर्कलह और आत्मचिंतन की प्रवृत्ति आने वाले समय में संगठन को भीतर से कमजोर करेगी।

गौरतलब है कि हाल ही में भूपति ने अपने 60 साथियों के साथ आत्मसमर्पण किया था। वह सीपीआई (माओवादी) की पोलित ब्यूरो और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का प्रमुख सदस्य था। उसने महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर अबूझमाड़ के जंगलों से संगठन का संचालन किया और 2010 के दंतेवाड़ा हमले जैसी बड़ी घटनाओं की साजिश रची थी।

भूपति पर महाराष्ट्र, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में कुल 7 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। उनका आत्मसमर्पण नक्सल आंदोलन के भविष्य को प्रभावित करने वाला ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।