रायपुर में भव्यता के साथ मनाया गया उत्कल दिवस, संस्कृति और सम्मान का अद्भुत संगम
रायपुर के लोक भवन में उत्कल दिवस 2026 धूमधाम से मनाया गया, जिसमें ओडिशा की समृद्ध संस्कृति, रंगारंग प्रस्तुतियां और प्रतिभाओं का सम्मान मुख्य आकर्षण रहा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह ,रायपुर । 1 मार्च 2026। राजधानी रायपुर के लोक भवन में उत्कल दिवस 2026 बड़े ही हर्षोल्लास, गरिमा और भव्यता के साथ मनाया गया। यह आयोजन उड़िया समाज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ और ओडिशा से आए अनेक गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने इसकी गरिमा को और बढ़ा दिया।
इस भव्य आयोजन का संचालन पुरन्दर मिश्रा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें सर्व उड़िया समाज और उत्कल सांस्कृतिक परिषद का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता विष्णुदेव साय ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में रमेन डेका उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ हुई, जिसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दौर शुरू हुआ। इस अवसर पर ओडिसी नृत्य, संबलपुरी नृत्य, पारंपरिक गीत और भजन की शानदार प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को जीवंत कर दिया। पूरे लोक भवन परिसर में उत्सव का माहौल देखने को मिला और दर्शक इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लेते नजर आए।
उत्कल दिवस के अवसर पर समाज के प्रतिभाशाली और विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। यह सम्मान रमेन डेका के करकमलों से प्रदान किया गया, जिससे सम्मानित व्यक्तियों में गर्व और उत्साह का वातावरण बना। यह समारोह समाज के उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम बना, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
इस अवसर पर उत्कल शिरोमणि डॉ. मधुसूदन दास को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके स्मारक स्थल पर विधायक पुरन्दर मिश्रा द्वारा माल्यार्पण कर उन्हें याद किया गया। डॉ. मधुसूदन दास को ओडिशा के सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सांस्कृतिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करते हैं। उन्होंने उड़िया समाज की सांस्कृतिक समृद्धि की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध काफी गहरे हैं, जिन्हें इस तरह के आयोजनों से और मजबूती मिलती है।
कार्यक्रम में पार्षदगण, समाजसेवी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को एक यादगार और प्रेरणादायक अनुभव बताया।
कुल मिलाकर, उत्कल दिवस का यह भव्य आयोजन न केवल सांस्कृतिक विविधता का उत्सव रहा, बल्कि समाज में एकता, सम्मान और गौरव की भावना को भी सुदृढ़ करने में सफल रहा।