आखिरकार सुनी गई आधी आबादी की आवाज़: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से लोकतंत्र में महिलाओं को मिलेगा न्यायोचित स्थान
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। यह अधिनियम संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण प्रदान कर उन्हें नीति-निर्माण में समान भागीदारी का अवसर देता है, जिससे लोकतंत्र और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनेगा।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l भारत में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। प्राचीन काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने ज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, वहीं इतिहास में अहिल्याबाई होल्कर और रानी लक्ष्मीबाई जैसी महिलाओं ने शासन और वीरता के अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किए। इसके बावजूद, स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में महिलाओं की भागीदारी लंबे समय तक सीमित रही। पहली लोकसभा में महिला सदस्यों की संख्या मात्र 4.4 प्रतिशत थी, जो दशकों बाद भी अपेक्षाकृत कम ही रही।
इस असंतुलन को दूर करने की दिशा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आया है। 19 सितंबर 2023 को संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। यह कदम केवल एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की दिशा में एक मजबूत प्रयास है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अधिनियम को महिलाओं की शक्ति, त्याग और सामर्थ्य को समर्पित बताया है। उनका मानना है कि जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तब देश भी मजबूत होता है। यह अधिनियम महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व ही नहीं देता, बल्कि उन्हें नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी प्रदान करता है।
इस अधिनियम की विशेषता यह है कि यह अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी उप-कोटा सुनिश्चित करता है, जिससे समाज के हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिल सके। यह पहल सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को और मजबूत करती है।
महिलाओं के सशक्तिकरण की यह यात्रा केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बीते वर्षों में स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन, उज्ज्वला योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन योजनाओं ने महिलाओं को गरिमा, सुरक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान की है, जो उन्हें समाज में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद करती हैं।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे नीतियों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षा जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलने की संभावना है। यह लोकतंत्र की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाएगा, क्योंकि विविध दृष्टिकोण नीति-निर्माण को अधिक प्रभावी और संवेदनशील बनाते हैं।
अंततः, यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र को एक नई दिशा देता है, जहां महिलाओं को केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णयकर्ता के रूप में स्थान मिलेगा। ‘आधी आबादी’ की आवाज़ को सुनने और उसे सशक्त बनाने की यह पहल भारत को ‘विकसित राष्ट्र’ बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।