बस्तर से जुड़ा बड़ा नक्सल नेटवर्क ध्वस्त: शीर्ष नेताओं ने आंध्रप्रदेश में किया सरेंडर

बस्तर से जुड़े नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। आंध्रप्रदेश में केंद्रीय समिति स्तर के नक्सली नेताओं सहित 10 कैडरों ने AK-47 हथियार के साथ आत्मसमर्पण किया है। इन पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था।

Mar 31, 2026 - 11:57
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बस्तर से जुड़ा बड़ा नक्सल नेटवर्क ध्वस्त: शीर्ष नेताओं ने आंध्रप्रदेश में किया सरेंडर

UNITED NEWS OF ASIA. महेश राव, छत्तीसगढ़ के बस्तर से जुड़े नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। पड़ोसी राज्य आंध्रप्रदेश में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा एजेंसियों को अहम सफलता मिली है। जानकारी के अनुसार, शीर्ष स्तर के नक्सली नेताओं समेत कुल 10 उग्रवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों में केंद्रीय समिति सदस्य स्तर के नेता भी शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से चेल्लुरी नारायण राव उर्फ सुरेश और बीके उर्फ सुरन्ना उर्फ सोमनना के नाम सामने आए हैं, जो संगठन में CCM (Central Committee Member) और SMC (Special Zonal Committee) स्तर के महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ये सभी नक्सली आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े थे और इनका नेटवर्क दक्षिण बस्तर क्षेत्र तक फैला हुआ था। इस कारण इनका आत्मसमर्पण न केवल आंध्रप्रदेश बल्कि छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के लिए भी बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

इन सभी नक्सलियों ने हरीश कुमार गुप्ता, पुलिस महानिदेशक, आंध्रप्रदेश के समक्ष आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण के दौरान इनके पास से AK-47 जैसे आधुनिक हथियार भी बरामद किए गए हैं, जो इनकी सक्रियता और संगठन में भूमिका को दर्शाते हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था। ये लंबे समय से विभिन्न नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थे और कई घटनाओं में इनकी भूमिका संदिग्ध मानी जाती रही है। ऐसे में इनका मुख्यधारा में लौटना सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी रणनीतिक सफलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार चल रहे एंटी-नक्सल ऑपरेशन, बढ़ता दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सलियों का मनोबल कमजोर हुआ है। यही कारण है कि अब शीर्ष स्तर के नेता भी आत्मसमर्पण का रास्ता अपना रहे हैं।

बस्तर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की सक्रियता और विकास कार्यों के चलते हालात में सुधार देखने को मिला है। इस तरह के आत्मसमर्पण से नक्सल संगठन को कमजोर करने में मदद मिलेगी और क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगी। साथ ही, इस सफलता के बाद अन्य सक्रिय नक्सलियों पर भी दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा बलों की रणनीति और लगातार प्रयासों से नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अब निर्णायक मोड़ आता दिखाई दे रहा है।