कांकेर में 11 माओवादी कैडरों ने किया सरेंडर, AK-47 के साथ मुख्यधारा में लौटे
छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 25 मार्च से 31 मार्च के बीच 11 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया है। इनमें दो कैडर 31 मार्च को AK-47 के साथ सरेंडर किए।
UNITED NEWS OF ASIA. रामकुमार भारद्वाज, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। बस्तर रेंज पुलिस के सतत प्रयासों के चलते 25 मार्च से 31 मार्च 2026 के बीच कुल 11 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते पांच दिनों में पहले 9 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया था। इसी क्रम में 31 मार्च को 2 और सक्रिय माओवादी कैडरों ने भी आत्मसमर्पण किया। इनकी पहचान PPCM शंकर और PM हिडमा डोडी के रूप में हुई है।
आत्मसमर्पण के दौरान इन माओवादी कैडरों ने एक AK-47 जैसे आधुनिक हथियार भी पुलिस को सौंपा है। इससे स्पष्ट होता है कि ये कैडर संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इनका मुख्यधारा में लौटना माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका है।
पुलिस द्वारा बताया गया है कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से मिली जानकारी के आधार पर इलाके में सक्रिय अन्य माओवादी सदस्यों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उद्देश्य है कि उन्हें भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा सके।
इस अभियान को सुन्दरराज पट्टलिंगम, पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज का मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने 25 मार्च से 31 मार्च के बीच आत्मसमर्पण करने वाले सभी 11 माओवादी कैडरों के निर्णय का स्वागत किया है और इसे क्षेत्र में शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
आईजी पट्टलिंगम ने शेष बचे माओवादी कैडरों से अपील करते हुए कहा कि उनके पास आत्मसमर्पण और पुनर्वास का विकल्प चुनने के लिए अब सीमित समय ही शेष है। उन्होंने माओवादी कैडरों से हिंसक गतिविधियों को त्यागकर शांतिपूर्ण, सामान्य और सम्मानजनक जीवन अपनाने का आग्रह किया।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी कैडरों को राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें आर्थिक मदद, प्रशिक्षण और समाज में पुनः स्थापित करने के लिए जरूरी सुविधाएं शामिल हैं।
25 मार्च से 31 मार्च तक आत्मसमर्पण करने वाले इन सभी 11 माओवादी कैडरों के सामाजिक पुनर्वास और मुख्यधारा में पुनः एकीकरण की प्रक्रिया आवश्यक औपचारिकताओं के पूर्ण होने के बाद आयोजित की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार चल रहे एंटी-नक्सल अभियान, सुरक्षा बलों की रणनीति और पुनर्वास नीति के प्रभाव से अब माओवादी कैडरों में बदलाव देखने को मिल रहा है। इससे बस्तर संभाग में शांति और विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
इस घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वित प्रयासों से नक्सलवाद जैसी चुनौती को धीरे-धीरे कमजोर किया जा रहा है।