तिल्दा नेवरा में आश्रय स्थल योजना पर उठे सवाल, किराए पर देने और कथित वसूली के आरोपों से बढ़ा विवाद
तिल्दा नेवरा नगर पालिका एक बार फिर विवादों में है। इस बार आश्रय स्थल योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जरूरतमंदों के लिए बनाए गए आश्रय स्थल को नियमों के विरुद्ध सब्जी व्यापारियों को किराए पर दिया गया और इसके बदले कथित रूप से 21 हजार रुपए तक की वसूली की गई। मामले में नगर पालिका अध्यक्ष पति का नाम चर्चाओं में है, जबकि शिकायत के बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर l तिल्दा नेवरा नगर पालिका एक बार फिर गंभीर आरोपों और विवादों के केंद्र में आ गई है। इस बार मामला शासन की महत्वपूर्ण आश्रय स्थल योजना से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर स्थानीय लोगों ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि जरूरतमंदों और आम नागरिकों की सुविधा के लिए बनाए गए आश्रय स्थल का उपयोग नियमों के विपरीत निजी किराएदारी और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का दावा है कि नगर पालिका क्षेत्र में स्थित आश्रय स्थल को कथित रूप से सब्जी व्यापारियों को किराए पर दिया गया है। आरोप यह भी है कि इसके बदले लगभग 21 हजार रुपए तक की राशि ली गई। पूरे मामले में नगर पालिका अध्यक्ष पति का नाम चर्चाओं में बना हुआ है, जिसके कारण राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है।
लोगों के अनुसार शासन द्वारा बनाई गई आश्रय स्थल योजना का उद्देश्य राहगीरों, गरीबों और जरूरतमंद लोगों को अस्थायी सुविधा उपलब्ध कराना था। लेकिन आरोप है कि इस योजना का उपयोग अब निजी लाभ के लिए किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रात के समय आश्रय स्थल में ताला लगाकर चाबी अपने पास रख ली जाती है और परिसर को सब्जियों एवं अन्य सामानों से भर दिया जाता है।
शहरवासियों का आरोप है कि यह पूरी तरह से शासन की मंशा और योजना के नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि किसी आम नागरिक द्वारा छोटी सी गलती भी की जाती है तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई करता है, लेकिन प्रभावशाली और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के मामलों में अधिकारी चुप्पी साध लेते हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष पति का नाम इससे पहले भी अवैध निर्माण, अतिक्रमण संरक्षण और आवास योजना में कथित वसूली जैसे मामलों में सामने आता रहा है। अब आश्रय स्थल योजना में कथित किराएदारी और वसूली के आरोपों ने विवाद को और बढ़ा दिया है। शहर में यह चर्चा भी तेज है कि राजनीतिक प्रभाव के कारण अब तक किसी प्रकार की सख्त कार्रवाई नहीं हो पाई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की शिकायत जिला कलेक्टर तक पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अब तक जांच या प्रशासनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसी वजह से प्रशासन की कार्यशैली और चुप्पी पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि शासन की योजनाओं का इस तरह दुरुपयोग होता रहेगा और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो आम जनता का भरोसा व्यवस्था से कमजोर होगा।
अब शहरवासियों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि आश्रय स्थल योजना को किराए पर देने, कथित वसूली और राजनीतिक संरक्षण जैसे आरोपों की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शासन की योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे और नगर पालिका में पारदर्शिता बनी रहे।