गाँव से GPAT और NIPER तक: कोरबा के पंकज मिन्ज की प्रेरक सफलता गाथा
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम सर्सदेवा के पंकज मिन्ज ने सीमित संसाधनों के बीच मेहनत, संघर्ष और लगन के बल पर GPAT और NIPER-JEE जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में सफलता हासिल की। आज वे NIPER हैदराबाद से M.S. (Pharm) कर Regulatory Affairs में कार्यरत हैं। उनकी कहानी गाँव के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
UNITED NEWS OF ASIA. अवास कैवर्त, कोरबा । कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों तो परिस्थितियाँ भी झुक जाती हैं। इसी बात को सच साबित किया है कोरबा जिले के ग्राम सर्सदेवा (पोस्ट श्यांग) निवासी पंकज मिन्ज ने। सीमित संसाधनों और ग्रामीण परिवेश के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित परीक्षाएँ GPAT और NIPER-JEE पास कर दिखाया और अपने गाँव का नाम पूरे देश में रोशन किया।
पंकज के पिता नॉरिस मिन्ज और माता गीता मिन्ज साधारण किसान परिवार से हैं। गाँव में शिक्षा की स्थिति कमजोर है, बिजली और नेटवर्क की समस्या आम बात है। लेकिन पंकज ने इन कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से फार्मेसी में स्नातक (2017–2021) किया और 74.75% अंकों के साथ उत्तीर्ण हुए।
कोविड-19 महामारी के दौर में जब पूरा देश ठहर गया था, तब पंकज ने ऑनलाइन माध्यम से GPAT की तैयारी शुरू की। बार-बार बिजली कटने और नेटवर्क बाधाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और माता-पिता के आशीर्वाद ने रंग लाया — वर्ष 2021 में पंकज ने GPAT और NIPER दोनों परीक्षाएँ पास कीं।
इसके बाद उन्होंने NIPER हैदराबाद से M.S. (Pharm) in Regulatory Toxicology (2021–2023) की उपाधि प्राप्त की। यहाँ उन्होंने “Natural molecules as NorA efflux pump inhibitors against Staphylococcus aureus” पर रिसर्च प्रोजेक्ट पूरा किया। उनके रिसर्च कार्य में ड्रग स्क्रीनिंग, एनिमल हैंडलिंग, और हिस्टोपैथोलॉजिकल अध्ययन शामिल रहे।
पोस्ट-ग्रेजुएशन के बाद पंकज ने Hetero Drugs Limited, हैदराबाद में जूनियर ऑफिसर (Regulatory Affairs) के रूप में कार्य किया, जहाँ उन्होंने ताइवान, सिंगापुर और चीन के लिए रेगुलेटरी डॉसियर और क्लिनिकल डाटा प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
पंकज मिन्ज का कहना है — “संघर्ष हर किसी की जिंदगी में होता है, लेकिन जो लगातार मेहनत करते हैं, वही मंज़िल तक पहुँचते हैं। सफलता के लिए मेहनत, निरंतर अभ्यास और विश्वास जरूरी है।”
आज पंकज की सफलता की कहानी न केवल उनके गाँव सर्सदेवा बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि छोटे गाँव से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं, बशर्ते इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची।