MCB News : रेलवे पुलिस आरक्षक को फंसाने की साजिश बेनकाब, महिला निरीक्षक पर गंभीर आरोप
मनेन्द्रगढ़ में रेलवे पुलिस आरक्षक उपदेश कुमार पर दर्ज दुष्कर्म और एससी/एसटी एक्ट के मामले में सनसनीखेज मोड़ सामने आया है। एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुलासा हुआ है कि महिला निरीक्षक सुनीता मिंज ने आपसी रंजिश के चलते साजिश रचकर आरक्षक को हनी ट्रैप में फंसाया। मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र शुक्ला, मनेन्द्रगढ़ (एमसीबी) | मनेन्द्रगढ़। सिटी कोतवाली मनेन्द्रगढ़ में रेलवे पुलिस आरक्षक उपदेश कुमार के खिलाफ दर्ज धारा 376 एवं एससी/एसटी एक्ट के मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सामने आई एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने पूरे मामले को साजिश और हनी ट्रैप की ओर मोड़ दिया है।
जानकारी के अनुसार, रेलवे पुलिस की महिला निरीक्षक सुनीता मिंज की आरक्षक उपदेश कुमार से पुरानी रंजिश थी। इसी रंजिश के चलते निरीक्षक ने एक स्थानीय युवक को अपने प्रभाव में लिया और उसे लालच देकर आरक्षक को फंसाने की साजिश रची।
साजिश के तहत युवक ने पैसों के बदले एक युवती को तैयार किया, ताकि आरक्षक पर बलात्कार जैसा गंभीर आरोप लगाया जा सके। इसके बाद स्थानीय प्रभावशाली लोगों और कुछ राजनीतिक रसूख के सहारे मनेन्द्रगढ़ सिटी कोतवाली में मामला दर्ज कराया गया।
पूरा मामला तब उजागर हुआ जब एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सार्वजनिक हुई। इस रिकॉर्डिंग में कथित रूप से निरीक्षक सुनीता मिंज और स्थानीय युवक के बीच साजिश, पैसों के लेन-देन और आरक्षक को बर्बाद करने की योजना पर बातचीत सुनाई दे रही है।
मामला दर्ज होने के बाद रेलवे पुलिस आरक्षक उपदेश कुमार को जेल भेज दिया गया था और विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबित भी कर दिया गया। अब इस खुलासे के बाद पुलिस विभाग की छवि और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले से जुड़े प्रमुख सवाल
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क्या आरक्षक को झूठे साक्ष्यों के आधार पर फंसाया गया?
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क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठी अधिकारी ने कानून का दुरुपयोग किया?
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क्या प्रारंभिक जांच में कोतवाली पुलिस से गंभीर चूक हुई?
सच्चाई सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और आरक्षक के परिजनों में भारी आक्रोश है। मांग की जा रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी निरीक्षक सहित सभी साजिशकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि कानून का दुरुपयोग कर किसी निर्दोष को फंसाने की पुनरावृत्ति न हो।