अवैध धान परिवहन पर कार्रवाई, 93 हजार रुपये मूल्य के 30 क्विंटल धान जप्त
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में अवैध धान परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। मरवाही विकासखंड के ग्राम धनपुर में मध्य प्रदेश से अवैध रूप से लाए जा रहे 30 क्विंटल धान को जप्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 93 हजार रुपये बताई गई है। कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच दल ने की।
UNITED NEWS OF ASIA. सत्यम दिक्सित , राज्य सरकार के निर्देशानुसार गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में समर्थन मूल्य पर किसानों से धान खरीदी का कार्य सुचारू, पारदर्शी एवं व्यवस्थित रूप से किया जा रहा है। धान खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले कोचियों, बिचौलियों एवं व्यापारियों द्वारा अवैध रूप से धान के परिवहन, भंडारण एवं उपार्जन केंद्रों में खपाए जाने की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी के निर्देश पर जिले में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए जिला स्तरीय उड़न दस्ता एवं जांच दलों का गठन किया गया है। ये दल राज्य और जिले की सीमा क्षेत्रों के साथ-साथ धान उपार्जन केंद्रों पर भी लगातार निगरानी कर रहे हैं। जांच दलों द्वारा नियमित निरीक्षण एवं सघन कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसानों के हितों की रक्षा की जा सके और समर्थन मूल्य प्रणाली में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
इसी क्रम में शनिवार को मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम धनपुर में मध्य प्रदेश राज्य से अवैध रूप से धान का परिवहन किए जाने का मामला सामने आया। जांच के दौरान पिकअप वाहन क्रमांक एमपी-54-जेडसी-4757 को रोका गया, जिसमें लगभग 30 क्विंटल धान अवैध रूप से ले जाया जा रहा था। जप्त किए गए धान की अनुमानित कीमत लगभग 93 हजार रुपये बताई गई है।
प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई करते हुए धान सहित पिकअप वाहन को जब्त कर लिया गया और रक्षित आरक्षित केंद्र अमरपुर, पेंड्रा के सुपुर्द कर दिया गया। जप्ती की यह कार्रवाई तहसीलदार प्रीति शर्मा, खाद्य निरीक्षक आशीष पांडे एवं हल्का पटवारी विपिन योगी की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अवैध परिवहन या बिचौलियों की भूमिका को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में भी जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया और अधिक सख्त की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल पात्र किसानों को ही समर्थन मूल्य का लाभ मिले और धान खरीदी व्यवस्था पूरी तरह निष्पक्ष बनी रहे।