श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन

चांदा सुल्तानपुर के रामनगर में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।

Feb 7, 2026 - 20:06
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श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का हुआ भावपूर्ण वर्णन

UNITED NEWS OF ASIA. चांदा सुल्तानपुर। चांदा क्षेत्र के रामनगर गांव में आयोजित संगीतमयी श्रीमद भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के पंचम दिवस भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण एवं विस्तृत वर्णन किया गया। कथा वाचन के लिए दशरथ गद्दी अयोध्या धाम से पधारे डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी महाराज ने श्रद्धालुओं को श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं का श्रवण कराया।

कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान शांति देवी, पत्नी रामप्रताप मिश्र ने आचार्यगणों के साथ विधि-विधान से व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात महाराज श्री ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सच्चा धनवान वही व्यक्ति है जो अपने तन, मन और धन से सेवा एवं भक्ति करता है। उन्होंने बताया कि भगवान की कृपा से ही जीवन में सुख-समृद्धि संभव है।

महाराज श्री ने पूतना चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि राक्षसी पूतना ने बालक श्रीकृष्ण को विषपान कराने का प्रयास किया, लेकिन भगवान ने दूध पीते ही उसका वध कर उसका भी कल्याण कर दिया। उन्होंने बताया कि माता यशोदा ने पूतना वध के बाद पंचगव्य से भगवान श्रीकृष्ण का स्नान कराया। इस प्रसंग के माध्यम से महाराज श्री ने गौ सेवा का महत्व बताते हुए कहा कि गाय की सेवा करने से 33 करोड़ देवी-देवताओं की सेवा का पुण्य प्राप्त होता है।

कथा के दौरान श्रीकृष्ण की माटी खाने की लीला का भी वर्णन किया गया। महाराज श्री ने बताया कि जब ग्वाल बालों ने यशोदा माता से शिकायत की कि श्रीकृष्ण ने मिट्टी खाई है, तब माता ने श्रीकृष्ण से मुख खोलने को कहा। श्रीकृष्ण के मुख में यशोदा माता को सम्पूर्ण सृष्टि का दर्शन हुआ, जिसमें आकाश, पृथ्वी, पर्वत, समुद्र, देवगण, काल, कर्म सहित सम्पूर्ण ब्रह्मांड दिखाई दिया।

महाराज श्री ने आगे बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र पूजा छोड़कर गिरिराज पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा कर दी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की। इसके बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान से क्षमा मांगी।

कथा के दौरान महाराज श्री ने युवाओं को अपने धर्म और संस्कृति से जुड़ने का संदेश देते हुए गीता और रामायण पढ़ने की प्रेरणा दी, जिससे आने वाली पीढ़ियों में संस्कारों का विकास हो सके।

महाराज श्री के मनमोहक भजनों पर कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। इस अवसर पर पं. संजय तिवारी (शास्त्री जी), रमेश मिश्र, राकेश चंद्र मिश्र, पवन मिश्र, आशुतोष मिश्र, हिमांशु मिश्र, लवकुश मिश्र, दिव्यांशु मिश्र, पं. सुधांशु तिवारी सहित बड़ी संख्या में कथा प्रेमी उपस्थित रहे।