सर्व पिछड़ा वर्ग समाज की ओर से लंबे समय से इन मुद्दों को लेकर जनजागरूकता और संगठनात्मक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। सितंबर माह में बस्तर संभाग के अलग-अलग जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बैठकों का आयोजन कर 3 अक्टूबर की कोंडागांव महारैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की रणनीति बनाई गई थी।
महारैली में समाज की ओर से राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी के लिए पृथक कॉलम या स्थान उपलब्ध कराने की मांग रखी गई। इससे पहले मार्च 2026 में भी कोंडागांव के सर्व पिछड़ा वर्ग समाज ने जनगणना 2026-27 में ओबीसी को शामिल करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अन्य संवैधानिक पदाधिकारियों के नाम ज्ञापन सौंपा था। उस ज्ञापन में ओबीसी की जनसंख्या से संबंधित आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए जनगणना में अलग से उल्लेख किए जाने की मांग की गई थी।
दूसरी प्रमुख मांग ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़ी रही। समाज की ओर से आरक्षण का लाभ देने की मांग को लेकर पहले भी संभाग और जिला स्तर पर बैठकें आयोजित की गई थीं। सितंबर में आयोजित बैठकों में भी 27 प्रतिशत आरक्षण को प्रमुख मुद्दे के रूप में रखा गया था और 3 अक्टूबर की महारैली में इस मांग को उठाने की बात कही गई थी।
तीसरी मांग पिछड़ा वर्ग समाज को संविधान की पांचवीं अनुसूची में शामिल करने से संबंधित रही। समाज के प्रतिनिधियों ने इसे भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया। इसके लिए बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्रों से लोगों को कोंडागांव पहुंचने के लिए संगठन स्तर पर संपर्क और बैठकें की गई थीं।
महारैली के दौरान समाज के लोगों ने अपनी मांगों के समर्थन में रैली और सभा के माध्यम से अपनी बात रखी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार कोंडागांव जिला मुख्यालय में प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग समाज के लोग शामिल हुए। स्थानीय रिपोर्टों में सहभागिता को हजारों की संख्या में बताया गया है। वहीं उपयोगकर्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी में लाखों की संख्या में लोगों के उपस्थित होने का दावा किया गया है; इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी।
सर्व पिछड़ा वर्ग समाज की ओर से इन मांगों को लेकर आगे भी आंदोलन और जनजागरूकता गतिविधियां जारी रखने की बात कही गई है। महारैली के माध्यम से समाज ने जनगणना, आरक्षण और पांचवीं अनुसूची से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से सामने रखा। कोंडागांव में आयोजित यह कार्यक्रम बस्तर संभाग में पिछड़ा वर्ग समाज की मांगों को लेकर चल रही संगठनात्मक गतिविधियों की अगली कड़ी के रूप में सामने आया।