पेट्रोल के बढ़ते खर्च और EV की चार्जिंग चिंता के बीच क्यों बढ़ रही है हाइब्रिड कारों की मांग?

भारत में कार खरीदारों के बीच स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों की लोकप्रियता बढ़ रही है। पेट्रोल की लागत और लंबी दूरी के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को लेकर बनी चिंता के बीच हाइब्रिड तकनीक को एक वैकल्पिक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। टोयोटा, मारुति सुजुकी और होंडा जैसी कंपनियां हाइब्रिड मॉडल पेश कर रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हाइब्रिड वाहनों के रजिस्ट्रेशन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

Oct 2, 2026 - 20:40
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पेट्रोल के बढ़ते खर्च और EV की चार्जिंग चिंता के बीच क्यों बढ़ रही है हाइब्रिड कारों की मांग?

UNITED NEWS OF ASIA. भारत में कार खरीदने वाले ग्राहकों के सामने इन दिनों कई विकल्प मौजूद हैं। पेट्रोल और डीजल के साथ सीएनजी तथा इलेक्ट्रिक वाहनों ने भी बाजार में अपनी जगह बनाई है। इसी बीच स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों की मांग भी बढ़ती दिखाई दे रही है। पेट्रोल की लागत और इलेक्ट्रिक वाहनों में लंबी दूरी के दौरान चार्जिंग को लेकर बनी चिंता के बीच हाइब्रिड तकनीक को एक बीच के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन के साथ इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी का इस्तेमाल किया जाता है। इस तकनीक की खासियत यह है कि वाहन जरूरत के अनुसार पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर के बीच अपने आप बदलाव कर सकता है। शहरों में कम रफ्तार और ट्रैफिक के दौरान वाहन इलेक्ट्रिक मोटर की मदद से चल सकता है, जबकि ज्यादा रफ्तार या अधिक पावर की जरूरत होने पर पेट्रोल इंजन काम करने लगता है।

प्लग से चार्ज करने की जरूरत नहीं

स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों की एक खास बात यह है कि इन्हें सामान्य इलेक्ट्रिक कार की तरह बाहरी चार्जर से चार्ज करने की जरूरत नहीं होती। वाहन की बैटरी ब्रेक लगाने के दौरान पैदा होने वाली ऊर्जा के जरिए चार्ज होती रहती है। इसे रीजनरेटिव ब्रेकिंग कहा जाता है।

शहर और हाईवे दोनों में उपयोग

हाइब्रिड तकनीक खास तौर पर शहरों के ट्रैफिक में उपयोगी मानी जाती है, जहां वाहन को बार-बार रोकना और चलाना पड़ता है। ऐसे समय में इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल पेट्रोल इंजन पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है। वहीं हाईवे पर जरूरत के अनुसार पेट्रोल इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर का इस्तेमाल किया जाता है।

इसी वजह से हाइब्रिड वाहनों को पेट्रोल कार और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहन के बीच एक विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि वास्तविक माइलेज ड्राइविंग परिस्थितियों, वाहन मॉडल और उपयोग के तरीके पर निर्भर करता है।

बढ़ रहे हैं हाइब्रिड वाहनों के रजिस्ट्रेशन

उपलब्ध वाहन पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, बीते वित्त वर्ष में हाइब्रिड वाहनों के रजिस्ट्रेशन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जहां पहले हाइब्रिड वाहनों के रजिस्ट्रेशन करीब 91 हजार थे, वहीं यह संख्या बढ़कर 3.64 लाख से अधिक हो गई।

हालिया तिमाही आंकड़ों में भी हाइब्रिड कारों की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 118 प्रतिशत की बढ़त का उल्लेख किया गया है। इस सेगमेंट में टोयोटा की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत से अधिक बताई गई है, जबकि मारुति सुजुकी भी इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है।

कई कंपनियां पेश कर रहीं हाइब्रिड मॉडल

भारतीय बाजार में टोयोटा, मारुति सुजुकी और होंडा जैसी कंपनियां हाइब्रिड मॉडल पेश कर रही हैं। टोयोटा हाइराइडर और होंडा सिटी हाइब्रिड जैसे मॉडल इस तकनीक के प्रमुख उदाहरणों में शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन मॉडलों की मांग में भी वृद्धि देखी गई है।

कुल पैसेंजर व्हीकल बाजार में हाइब्रिड वाहनों की हिस्सेदारी करीब 8 प्रतिशत तक पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि बाजार की हिस्सेदारी और बिक्री के आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं।

हाइब्रिड कारों की बढ़ती मांग से संकेत मिलता है कि भारतीय वाहन बाजार में ग्राहक केवल पेट्रोल या पूरी तरह इलेक्ट्रिक विकल्पों तक सीमित नहीं हैं। ईंधन खर्च, ड्राइविंग जरूरत, चार्जिंग सुविधा और वाहन की कीमत जैसे कई कारक खरीदारी के फैसले को प्रभावित कर रहे हैं।