हर साल FASTag रिन्यू कराने की जरूरत नहीं
नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव वार्षिक नवीनीकरण से जुड़ा है। पहले टोल छूट का लाभ लेने वाले दिव्यांग व्यक्तियों को प्रत्येक 12 महीने में अपने FASTag का नवीनीकरण कराना पड़ता था। इसके लिए आवेदन करने के साथ दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन भी कराना होता था। इससे लाभार्थियों को बार-बार प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था।
अब इस वार्षिक नवीनीकरण की अनिवार्यता को समाप्त किया गया है। नई व्यवस्था के तहत FASTag की वैधता दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर निर्धारित की जाएगी।
70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता पर 5 साल की वैधता
दिए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन पात्र व्यक्तियों की दिव्यांगता 70 प्रतिशत से 100 प्रतिशत के बीच है, उनके वाहन के लिए जारी छूट वाला FASTag 5 वर्षों तक वैध रहेगा।
वहीं, 40 प्रतिशत से अधिक और 70 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले पात्र व्यक्तियों के लिए विशेष FASTag की वैधता 3 वर्ष निर्धारित की गई है। इस तरह पात्र लोगों को निर्धारित अवधि तक बार-बार आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
वैधता समाप्त होने पर दोबारा होगा सत्यापन
निर्धारित 3 या 5 वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद FASTag को आगे बढ़ाने के लिए दोबारा दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा सकेगा। इससे नियमित रूप से होने वाली कागजी प्रक्रिया कम होगी और पात्र लाभार्थियों को लंबे समय तक सुविधा मिल सकेगी।
क्या हैं पात्रता की शर्तें
टोल छूट का लाभ लेने के लिए आवेदक के पास केंद्र या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दिव्यांगता प्रमाण पत्र यानी UDID कार्ड होना जरूरी है। इसके अलावा जिस वाहन पर विशेष FASTag लगाया जा रहा है, वह दिव्यांग व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत होना चाहिए या उनके उपयोग के लिए विशेष रूप से अनुकूलित अथवा पंजीकृत होना चाहिए।
दुरुपयोग पर हो सकती है कार्रवाई
नई व्यवस्था में विशेष FASTag के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी प्रावधान हैं। यदि कोई गैर-पात्र व्यक्ति इस सुविधा का अनुचित लाभ उठाने का प्रयास करता है, तो संबंधित FASTag को निष्क्रिय या ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
आवेदन में किन दस्तावेजों की जरूरत
योग्य व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत NHAI या सड़क परिवहन मंत्रालय के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के दौरान वैध UDID कार्ड, वाहन का पंजीयन प्रमाण पत्र यानी RC और पहचान संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। दी गई जानकारी के अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा उपलब्ध है।
नई व्यवस्था से दिव्यांगजनों को टोल छूट के लिए बार-बार होने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही डिजिटल सत्यापन के माध्यम से पात्रता की जांच और विशेष FASTag के दुरुपयोग पर निगरानी को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है।