सरायपाली के किसड़ी में सरपंच से जातिगत भेदभाव का आरोप, सचिव पर कार्रवाई की मांग
महासमुंद जिले के सरायपाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सरपंच नीलमणि रात्रे के साथ कथित जातिगत भेदभाव किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई ने सरपंच के ऊपर तुलसी मिला पानी छिड़कवाकर मंत्रोच्चारण कराया। सरपंच ने प्रशासन और पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। जनपद पंचायत CEO राजेश साहू ने मामला संज्ञान में आने की पुष्टि करते हुए सचिव को हटाने का प्रस्ताव भेजने की बात कही है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l सरायपाली क्षेत्र की ग्राम पंचायत किसड़ी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान सरपंच के साथ कथित जातिगत भेदभाव किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत सचिव पृथ्वीराज भोई ने सरपंच नीलमणि रात्रे के साथ सार्वजनिक रूप से ऐसा व्यवहार किया, जिसे ग्रामीण जातिगत भेदभाव और कथित “शुद्धिकरण” की घटना बता रहे हैं। मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पंचायत भवन में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया गया था। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान पंचायत सचिव ने सरपंच के ऊपर तुलसी मिला पानी छिड़कवाया और पंडित को बुलाकर मंत्रोच्चारण कराया। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि यह कथित कृत्य सरपंच की जाति को लेकर किया गया। हालांकि, घटना के संबंध में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक जांच अभी बाकी है।
मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों और पंचायत सदस्यों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच ग्राम पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार का जातिगत भेदभाव स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीण मुरलीधर के अनुसार सरपंच का सार्वजनिक रूप से इस तरह अपमान किया जाना पूरे गांव के सम्मान से जुड़ा विषय है।
बताया जा रहा है कि सरपंच ने घटना को लेकर जिला कलेक्टर महासमुंद, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, SDM और सरायपाली पुलिस को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में संबंधित सचिव के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि सचिव और सरपंच के बीच पहले से विवाद रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार इससे पहले सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन प्रस्ताव सफल नहीं हुआ और सरपंच अपने पद पर बने रहे। ग्रामीण इस पुराने विवाद को भी वर्तमान घटनाक्रम से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में भी आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले में जातिगत भेदभाव के आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि जांच में जाति के आधार पर अपमान या भेदभाव की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। किसी व्यक्ति की जातिगत पहचान से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जाना उचित होगा।
जनपद पंचायत CEO राजेश साहू ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जातिगत दुर्भावना रखना गलत है। उन्होंने बताया कि सरपंच की ओर से आवेदन प्राप्त हुआ है और संबंधित सचिव को हटाने का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
फिलहाल मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और आगे की कार्रवाई का इंतजार है। ग्रामीणों की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।