इन तीन स्कूलों में शुरू हुआ कार्यक्रम
साईंश्योर न्यूट्रिशन पायलट प्रोजेक्ट के तहत नवीन प्राथमिक शाला नवागांव, प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल परसदा तथा शासकीय विद्यालय छेरीखेड़ी के बच्चों को पोषण सहयोग दिया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को नियमित पौष्टिक आहार सहयोग उपलब्ध कराना है, जिससे उनके स्वास्थ्य और समग्र विकास को बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम के तहत बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। पहल के माध्यम से पोषण और शिक्षा के बीच संबंध को ध्यान में रखते हुए स्कूली बच्चों को सहयोग प्रदान करने की योजना है।
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत
साईंश्योर न्यूट्रिशन कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर श्री सत्य साईं अन्नपूर्णा ट्रस्ट के ट्रस्टी आनंद कडली, शिक्षा विभाग के अधिकारी, संबंधित विद्यालयों के शिक्षक और श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल की टीम सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने बच्चों को साईंश्योर न्यूट्रिशन का वितरण किया और पायलट प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को महत्वपूर्ण बताया गया।
देश के कई राज्यों में पहुंच रही पोषण सेवा
ट्रस्ट के अनुसार, वर्तमान में देश के 25 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों तक प्रातःकालीन पोषण सेवा पहुंचाई जा रही है। छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले से शुरू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट इसी पहल का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री की मुलाकात के बाद पहल
जानकारी के अनुसार जुलाई 2026 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सत्य साईं ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने सद्गुरु मधुसूदन साईं से मुलाकात की थी। पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं को लेकर चर्चा हुई थी। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में साईंश्योर न्यूट्रिशन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में पहल आगे बढ़ी।
अन्य क्षेत्रों में विस्तार की योजना
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि पोषित बच्चा बेहतर तरीके से सीख सकता है। रायपुर जिले में लगभग 500 बच्चों के साथ शुरू किए गए इस पायलट प्रोजेक्ट से मिलने वाले अनुभवों के आधार पर भविष्य में इसे राज्य के अन्य क्षेत्रों और अधिक शासकीय विद्यालयों तक विस्तारित करने की योजना है।
इस पहल के माध्यम से स्कूली बच्चों को पोषण सहयोग उपलब्ध कराने के साथ उनके स्वास्थ्य, एकाग्रता, सीखने की क्षमता और समग्र विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर इसके आगामी विस्तार की दिशा तय की जाएगी।