धमतरी में ‘समझदार पालक-सशक्त प्रदेश’ कार्यशाला आयोजित, बच्चों के सुरक्षित भविष्य और बेहतर पेरेंटिंग पर हुआ मंथन

धमतरी में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर आयोजित ‘समझदार पालक-सशक्त प्रदेश’ कार्यशाला में अभिभावकों को बेहतर पेरेंटिंग, बच्चों के मानसिक विकास और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने सुरक्षित बचपन, सकारात्मक संवाद और संवेदनशील पारिवारिक वातावरण की आवश्यकता पर जोर दिया।

Aug 1, 2026 - 12:17
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धमतरी में ‘समझदार पालक-सशक्त प्रदेश’ कार्यशाला आयोजित, बच्चों के सुरक्षित भविष्य और बेहतर पेरेंटिंग पर हुआ मंथन

UNITED NEWS OF ASIA. धमतरी l बच्चों के सर्वांगीण विकास, उनके अधिकारों की सुरक्षा और परिवारों में सकारात्मक एवं संवेदनशील वातावरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से धमतरी में ‘समझदार पालक-सशक्त प्रदेश’ विषय पर एक दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों, बाल कल्याण समिति के सदस्यों, प्रबुद्ध नागरिकों तथा 40 से अधिक अभिभावकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

कार्यशाला का उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के प्रति जागरूक करना था, ताकि घर का वातावरण बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित, सहयोगपूर्ण और प्रेरणादायक बन सके। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक गतिविधियों और संवाद आधारित सत्रों के माध्यम से प्रभावी पेरेंटिंग के तरीके सिखाए गए।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने अपने दो दिवसीय धमतरी प्रवास के दौरान आयोजित इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे पहली जिम्मेदारी उनके माता-पिता की होती है। उन्होंने कहा कि हर मां अपने बच्चे के लिए देवकी होती है, लेकिन समाज की जिम्मेदारी इससे आगे बढ़कर उन बच्चों तक भी पहुंचनी चाहिए जो किसी कारणवश उपेक्षित, बेसहारा या गलत रास्ते पर चले गए हैं। उन्होंने अभिभावकों और समाज से ऐसे बच्चों के लिए यशोदा जैसी संवेदनशील भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में रायपुर की मनोवैज्ञानिक गार्गी पांडे ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तित्व विकास पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बच्चों का आत्मविश्वास उनके घर के वातावरण और माता-पिता के व्यवहार से विकसित होता है। यदि अभिभावक बच्चों की बातों को ध्यान से सुनें, उनके साथ मित्रवत व्यवहार करें और बदलते व्यवहार को समय रहते समझें, तो कई मानसिक और सामाजिक समस्याओं को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए।

बाल अधिकार विशेषज्ञ दिव्यांशी शर्मा ने कार्यशाला में बच्चों के चार मूलभूत अधिकारों, बाल संरक्षण कानूनों तथा छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की भूमिका और शक्तियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक वातावरण में जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। इन अधिकारों की रक्षा में परिवार और समाज दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

कार्यक्रम के दौरान नगर निगम महापौर ने ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर पेरेंटिंग और बाल अधिकारों के प्रति जागरूक समाज ही संस्कारित और स्वस्थ भविष्य की मजबूत नींव तैयार कर सकता है। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी ने अभिभावकों से बच्चों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और उनके सर्वांगीण विकास के लिए सहयोगी वातावरण उपलब्ध कराने का आग्रह किया।

कार्यशाला के समापन पर प्रतिभागियों ने बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बेहतर संवाद, सकारात्मक पालन-पोषण और सुरक्षित बचपन सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का संकल्प लिया। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहल न केवल अभिभावकों को जागरूक बनाएगी, बल्कि बच्चों के लिए अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और सशक्त समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।