मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग का वनांचलों में विशेष अभियान, संवेदनशील क्षेत्रों की तैयारियों का लिया जायजा
स्वास्थ्य विभाग ने वर्षा ऋतु में मलेरिया रोकथाम के लिए कोटा और लोरमी के वन क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने शत-प्रतिशत सर्विलांस, त्वरित जांच, उपचार और रैपिड रिस्पांस टीमों को अलर्ट रखने के निर्देश दिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के संवेदनशील वन क्षेत्रों में निगरानी और नियंत्रण गतिविधियों को और अधिक मजबूत कर दिया है। इसी कड़ी में राज्य स्तरीय अधिकारियों ने बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड तथा मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर मलेरिया नियंत्रण की तैयारियों का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने अचानकमार, कोटा और अन्य वन बस्तियों में संचालित मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों का विस्तृत मूल्यांकन किया। इस दौरान यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया कि दूरस्थ और वन क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक परिवार तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं, मलेरिया जांच और उपचार की सुविधा पहुंचे। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों में रहने वाले परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
मैदानी निरीक्षण के दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी वन बस्तियों और वैकल्पिक आवासीय स्थलों में शत-प्रतिशत सक्रिय मलेरिया सर्विलांस सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक परिवार की लाइन लिस्टिंग तैयार करने, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने तथा मलेरिया रोधी दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही प्रत्येक संदिग्ध मरीज की तत्काल जांच कर समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने अधिकारियों को नियमित फील्ड मॉनिटरिंग और संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी संभावित संक्रमण को प्रारंभिक स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। विभाग का मानना है कि समय पर पहचान और उपचार से मलेरिया के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
निरीक्षण के दौरान संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. गायत्री बांधी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुंगेली डॉ. शीला शाह, उप संचालक वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. वी.आर. भगत तथा संबंधित जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों ने क्षेत्र में संचालित स्वास्थ्य गतिविधियों, सर्विलांस व्यवस्था, जांच प्रक्रिया और उपचार सुविधाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मैदानी अमले से चर्चा कर आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
स्वास्थ्य विभाग ने जिला एवं विकासखंड स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी क्षेत्र से मलेरिया क्लस्टर या संभावित प्रकोप की सूचना प्राप्त होती है, तो 24 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचकर जांच, उपचार और नियंत्रण संबंधी सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी।
विभाग ने स्पष्ट किया कि वर्षा ऋतु के दौरान मलेरिया के प्रत्येक संभावित मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। राज्य स्तर पर लगातार मैदानी निगरानी, नियमित समीक्षा और त्वरित हस्तक्षेप की रणनीति अपनाई जा रही है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से बुखार से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर अतिरिक्त ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इन संवेदनशील वर्गों में समय रहते संक्रमण की पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है।
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक समय पर जांच, उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराकर मलेरिया के प्रसार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है। विभाग ने लोगों से भी अपील की है कि बुखार या मलेरिया जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतें।