दौरे के दौरान परिवार के सदस्यों ने बिलासपुर जिले के गनियारी स्थित जनस्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने अचानकमार टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बम्हनी और छपरवा जैसे गांवों का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने विशेष रूप से बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उनकी जीवनशैली, समस्याओं और जरूरतों को करीब से समझने का प्रयास किया।
परिवार की महिलाओं ने ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ समय बिताया और उनसे सीधे संवाद किया। इस दौरान उन्होंने फुलवारी केंद्र और आंगनबाड़ी में जाकर बच्चों से मुलाकात की तथा उनके पोषण और शिक्षा की स्थिति के बारे में जानकारी ली। बच्चों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने उनके दैनिक जीवन, पढ़ाई और स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया।
इस दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और जनस्वास्थ्य समिति के सदस्यों से भी चर्चा की। इस दौरान स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और चुनौतियों को समझने का प्रयास किया गया। साथ ही शिक्षा व्यवस्था का भी निरीक्षण करते हुए उन्होंने स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली पर फीडबैक लिया।
ग्रामीणों के अनुसार, यह दौरा भले ही सादगीपूर्ण और बिना किसी औपचारिक प्रचार के किया गया हो, लेकिन इससे स्थानीय लोगों में उत्साह और जागरूकता का माहौल बना है। लोगों को यह महसूस हुआ कि देश के प्रतिष्ठित परिवारों द्वारा उनकी समस्याओं और जीवनशैली को समझने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि इस दौरे को लेकर किसी आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने इसे चर्चा का विषय बना दिया है। लोग इस पहल की सराहना कर रहे हैं और इसे सामाजिक संवेदनशीलता का उदाहरण मान रहे हैं।
इस तरह का दौरा न केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को समझने में मदद करता है, बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी इन क्षेत्रों के विकास और सुधार के लिए प्रेरित करता है।