शिक्षा का अधिकार प्री-प्राइमरी स्कूलों पर भी लागू: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा का अधिकार कानून की विस्तृत व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि RTE केवल कक्षा 1 तक सीमित नहीं है, बल्कि प्री-प्राइमरी व नर्सरी स्कूलों पर भी लागू होगा। कोर्ट ने अवैध स्कूलों पर सख्ती दिखाई है।
UNITED NEWS OF ASIA.अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम केवल कक्षा एक से पढ़ने वाले बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि जहां से बच्चे की औपचारिक शिक्षा प्रारंभ होती है, यानी प्री-प्राइमरी, नर्सरी एवं प्ले स्कूल स्तर से ही यह कानून लागू होगा।
न्यायालय ने कहा कि कानून निर्माताओं की मंशा बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की है। इसलिए प्री-प्राइमरी स्कूलों को RTE कानून के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता। यह टिप्पणी राज्य में संचालित हजारों नर्सरी एवं प्ले स्कूलों पर सीधा प्रभाव डालने वाली मानी जा रही है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य में बड़ी संख्या में चल रहे गैर-मान्यता प्राप्त एवं अवैध प्री-प्राइमरी स्कूलों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने इसे शिक्षा माफिया की कार्यप्रणाली बताते हुए राज्य शासन को निर्देश दिया कि वह ऐसे स्कूलों की मान्यता, संचालन और निगरानी के लिए शीघ्र ही स्पष्ट नीति और नियम बनाए।
इस जनहित याचिका में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में उपस्थित विकास तिवारी ने न्यायालय का ध्यान प्री-प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के साथ हो रहे शोषण एवं शिकायतों पर कार्रवाई न होने की ओर आकर्षित किया। उन्होंने रायपुर स्थित बिना मान्यता प्राप्त केपीएस किड्स स्कूल में एक छात्रा को अगरबत्ती से जलाने की गंभीर घटना का उल्लेख किया। इस पर उच्च न्यायालय ने शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए।
सुनवाई के दौरान रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में हुए भीषण अग्निकांड का मुद्दा भी उठाया गया, जिसमें निजी स्कूलों की मान्यता, RTE प्रवेश और फीस नियामक से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर नष्ट हो गए। विकास तिवारी ने आशंका जताई कि यह घटना षड्यंत्रपूर्वक की गई हो सकती है। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त कई रिकॉर्ड उनके पास सुरक्षित हैं।
इसके अलावा शिक्षा माफिया द्वारा उन्हें धमकी मिलने और जान का खतरा होने की बात भी न्यायालय के समक्ष रखी गई। हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गरीब-वंचित बच्चों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।